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डेस्क रिपोर्टर
नई दिल्ली, न्यूज वर्ल्ड डेस्क। दुनिया भर में मंकीपॉक्स के मामले तेज़ी से सामने आने लगे है। इस समय यह बीमारी दुनिया भर के लिए एक चिंता का विषय बन गया है। इसी बीच भारतीयों के लिए राहत भरी बात सामने आई है। देश में मंकीपॉक्स का मिलन स्ट्रेन सुपर स्प्रेडर नहीं है। इस बात की जानकारी मंकीपॉक्स के दो संक्रमितों की जीनोम सीक्वेंसिंग से सामने आई।
जांच के बाद केरल के निवासी दोनों मरीजों में वायरस का A.2 क्लैड पाया गया। वैज्ञानिकों के मुताबिक, मंकीपॉक्स के A.2 क्लैड के सुपर स्प्रेडर होने के कोई सबूत सामने नहीं आए हैं। बतादें कि, साल 2021 में मंकीपॉक्स का A.2 क्लैड थाईलैंड, फ्लोरिडा और वियतनाम में सामने आया था। वैज्ञानिकों की माने तो भारत की स्थिति अभी यूरोप और अमेरिका से एकदम अलग है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, केरल के यह दोनों व्यक्ति किसी संयोग के कारण संक्रमित हुए हैं। वहीं मंकीपॉक्स का वायरस यूरोप से काफी वक्त पहले दूसरे देशों में पहुंचा है। तो दूसरी ओर देश में मंकीपॉक्स से निपटने के लिए एक कार्यबल का गठन किया जा रहा है। यह केंद्र सरकार को इस बीमारी के नैदानिक और उपचार संबंधी सुविधाओं को बढ़ाने के साथ साथ इसके वैक्सीनेशन से संबंधित परामर्श और मार्गदर्शन लेगा।
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