
अमेरिका के मंच पर मुस्कुराकर किया गया एक साइन अब पाकिस्तान की सियासत में भूचाल ले आया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होना उनके लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। अपने ही देश में उन्हें तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह फैसला बिना संसद और राजनीतिक दलों से सलाह लिए किया गया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान है।
क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’?
22 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के लिए कई देशों के नेता अमेरिका पहुंचे थे। इसी दौरान करार पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया हुई। जब शहबाज शरीफ के सामने फाइल रखी गई तो वे ट्रंप के बगल में बैठे मुस्कुराते रहे और बिना कोई सवाल किए साइन कर दिया। यही तस्वीर अब पाकिस्तान में नाराजगी की वजह बन गई है।
विपक्ष का आरोप – संसद को किया नजरअंदाज
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता बैरिस्टर गोहर अली खान ने सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “यह फैसला बिना किसी चर्चा के लिया गया। कम से कम संसद में इस पर बहस होनी चाहिए थी।”
उन्होंने सवाल भी उठाया कि क्या पाकिस्तान हमास को हथियार छोड़ने के लिए मजबूर करेगा?
असद कैसर और मौलाना फजलुर रहमान भी नाराज
पीटीआई के वरिष्ठ नेता असद कैसर ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक देश में ऐसे फैसले संसद से होकर जाने चाहिए। वहीं JUI-F प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि जिन लोगों पर फिलिस्तीनियों की पीड़ा का आरोप है, वही इस बोर्ड में बैठे हैं। उन्होंने कहा कि गाजा पर बमबारी जारी है और शहबाज शरीफ ऐसे नेताओं के साथ “कंधे से कंधा मिलाकर” बैठेंगे।
पाकिस्तान में क्यों भड़का गुस्सा?
सोशल मीडिया पर भी शहबाज शरीफ की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें वे ट्रंप के साथ मुस्कुराते नजर आ रहे हैं। कई पाकिस्तानी इसे राष्ट्रीय सम्मान और विदेश नीति के साथ समझौता बता रहे हैं।
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