
नई दिल्ली। सीमा पर तैनात जवान अब सिर्फ वॉकी-टॉकी और अखबारों तक सीमित नहीं रहेंगे। करीब पांच साल बाद भारतीय सेना के जवानों को फिर से सोशल मीडिया एप्स देखने की अनुमति मिल गई है। लेकिन ध्यान रहे – ये आज़ादी पूरी नहीं है। जवान रील देख सकेंगे, वीडियो देख सकेंगे, लेकिन उंगलियां लाइक और कमेंट बटन तक नहीं पहुंचेंगी। आखिर सेना ने ऐसा फैसला क्यों लिया और इसमें क्या-क्या शर्तें जुड़ी हैं, आइए आपको आसान भाषा में पूरा मामला समझाते हैं।
क्या बदला नई गाइडलाइंस में?
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, भारतीय सेना ने हाल ही में अपने जवानों और अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इसके तहत:
Instagram: जवान रील, फोटो और वीडियो देख सकते हैं, लेकिन लाइक नहीं कर सकेंगे, कमेंट नहीं कर सकेंगे और कोई पोस्ट शेयर नहीं कर सकेंगे
YouTube और X (Twitter): सिर्फ जानकारी हासिल करने के लिए इस्तेमाल कर पाएंगे, पोस्ट करने या प्रतिक्रिया देने की अनुमति नहीं होगी।
WhatsApp और Telegram: गैर-गोपनीय (Non-confidential) जानकारी शेयर कर सकेंगे, वहीं कोई संवेदनशील या ऑपरेशनल डिटेल साझा करना सख्त मना
LinkedIn, Skype और Signal: इन प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल के लिए भी नई शर्तें तय की गई हैं ताकि प्रोफेशनल और निजी बातचीत के दौरान किसी तरह की गोपनीय जानकारी लीक न हो।
2020 में क्यों लगाया गया था सख्त बैन?
साल 2020 भारतीय सेना के लिए डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील रहा। उस वक्त सरकार ने जवानों और अधिकारियों को: Facebook, Instagram, TikTok, Zoom, PUBG समेत कुल 89 ऐप हटाने का आदेश दिया था। कारण साफ था – सोशल मीडिया के जरिए Honey Trap के कई मामले सामने आ। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के जरिए जवानों से संवेदनशील जानकारियां निकलवाने की घटनाएं हुईं। सीमा और नियंत्रण रेखा (LoC) से जुड़ी जानकारियां दुश्मन देशों तक पहुंचने का खतरा बढ़ गया था, इसके बाद सेना ने डिजिटल दुनिया से लगभग पूरी तरह दूरी बना ली थी।
आखिर अब ढील क्यों दी गई?
सेना से जुड़े एक वरिष्ठ सूत्र के मुताबिक, नई गाइडलाइंस कुछ दिन पहले ही लागू की गई हैं और यह सभी रैंकों पर समान रूप से लागू होंगी। सूत्र ने बताया – “इंफॉर्मेशन की दुनिया बदल चुकी है। आज सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि जानकारी और वैश्विक घटनाओं को समझने का बड़ा जरिया बन गया है। सेना इससे खुद को पूरी तरह काटकर नहीं रख सकती।” अब जवान देश-दुनिया की घटनाओं पर नजर रख सकेंगे। रक्षा, टेक्नोलॉजी और इंटरनेशनल अफेयर्स से जुड़े अपडेट्स देख सकेंगे और खुद को मानसिक रूप से ज्यादा जागरूक और अपडेटेड रख सकेंगे। लेकिन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
हनी ट्रैप से लेकर डेटा लीक तक – खतरा अभी भी बरकरार
सेना मानती है कि खतरे पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। 2020 से पहले कई जवानों को फर्जी प्रोफाइल्स के जरिए जाल में फंसाया गया, निजी बातचीत के बहाने उनसे यूनिट, लोकेशन और ऑपरेशनल जानकारियां ली गईं। इन सूचनाओं का इस्तेमाल पाकिस्तान और चीन जैसे देश सीमा पर तनाव बढ़ाने के लिए करते रहे। यही वजह है कि 2024 में सेना ने अपने अधिकारियों और जवानों को आधिकारिक कामकाज में WhatsApp के इस्तेमाल से भी बचने की सलाह दी थी और बाद में उस पर भी रोक लगा दी गई थी।
डिजिटल युग में सेना का संतुलन वाला कदम
नई गाइडलाइंस से साफ है कि भारतीय सेना अब “नो-सोशल मीडिया” नहीं बल्कि “कंट्रोल्ड सोशल मीडिया” के रास्ते पर चल पड़ी है। यानि जवान देख सकते हैं, सीख सकते हैं और जानकारी हासिल कर सकते हैं, लेकिन कुछ भी शेयर या रिएक्ट नहीं कर सकते। यह फैसला एक तरह से सुरक्षा और आधुनिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है।
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