
नई दिल्ली। भारत सरकार ने नेपाल की नई अंतरिम सरकार पर सकारात्मक रुख जताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम सुशीला कार्की के नेतृत्व में नेपाल में नई अंतरिम सरकार के गठन का स्वागत करते हैं। यह कदम शांति और स्थिरता को बढ़ावा देगा।” भारत ने दोहराया कि वह एक करीबी पड़ोसी और दीर्घकालिक विकास साझेदार के तौर पर नेपाल के साथ लोगों की भलाई और समृद्धि के लिए मिलकर काम करता रहेगा।
सुशीला कार्की ने ली शपथ
शुक्रवार देर रात 8:45 बजे नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकीं सुशीला कार्की ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। साथ ही, संसद को भंग कर दिया गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि नई सरकार को 6 महीने के भीतर चुनाव कराने का अधिकार है।
Gen-Z की तीन शर्तें
कार्की को अंतरिम सरकार सौंपने से पहले NGO हामी नेपाल और Gen-Z आंदोलन ने तीन अहम शर्तें रखीं:
1️⃣ संघीय संसद का विघटन – मान ली गई।
2️⃣ 8-9 सितंबर की पुलिस फायरिंग की न्यायिक जांच।
3️⃣ पूर्व पीएम के.पी. शर्मा ओली समेत सभी मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की संपत्ति जांच।
कार्की के सामने बड़ी चुनौतियां
अस्थिरता से स्थिरता: लंबे समय से राजनीतिक उथल-पुथल झेल रहे नेपाल को पटरी पर लाना।
लोकतंत्र को मजबूत करना: जनता के भरोसे को कायम रखना।
पारदर्शिता और जवाबदेही: Gen-Z की अपेक्षाओं पर खरा उतरना।
एक महिला जो न्यायपालिका से राजनीति के शिखर तक पहुंची हैं, उनके लिए यह ऐतिहासिक जिम्मेदारी है।
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