
नई दिल्ली। दक्षिण एशिया की राजनीति में एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। तालिबान सरकार ने भारत में अपने पहले राजदूत की नियुक्ति का फैसला किया है। यह कदम न केवल भारत-अफगानिस्तान संबंधों को नई दिशा देगा, बल्कि पाकिस्तान की टेंशन भी बढ़ा देगा। सूत्रों के मुताबिक, यह नियुक्ति नवंबर 2025 के मध्य तक हो सकती है।
यह 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता में लौटने के बाद भारत में किसी अफगान राजदूत की पहली आधिकारिक नियुक्ति होगी।
भारत में होगी तालिबान राजदूत की पहली तैनाती
तालिबान सरकार के प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि भारत में नए राजदूत की नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
इस राजदूत को दिल्ली स्थित अफगानिस्तान दूतावास में तैनात किया जाएगा। इसके साथ ही तालिबान सरकार दूसरे राजदूत की नियुक्ति की भी तैयारी कर रही है, जो संभवतः अगले साल की शुरुआत तक होगी। राजनयिकों का मानना है कि यह कदम भारत और अफगानिस्तान के बीच भरोसे और सहयोग की नई शुरुआत का प्रतीक है।
भारत बना तालिबान का “भरोसेमंद पार्टनर”
अफगान विदेश मंत्रालय ने भारत को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। “भारत अफगानिस्तान का भरोसेमंद पार्टनर है और हमें उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।” इससे पहले अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी (Amir Khan Muttaqi) ने दिल्ली दौरे के दौरान भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर (S. Jaishankar) से मुलाकात की थी। भारत ने भी हाल ही में काबुल स्थित अपने राजनयिक मिशन को फिर से पूर्ण दूतावास के रूप में सक्रिय किया और भारतीय राजदूत की नियुक्ति की थी।
पाकिस्तान में मची हलचल
भारत और तालिबान के बीच बढ़ती निकटता से इस्लामाबाद की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध इस कदम के बाद और बिगड़ सकते हैं। तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से ही दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और सैन्य झड़पें होती रही हैं। हाल ही में सीज़फायर समझौता तो हुआ था, लेकिन भरोसे की दीवार अब भी दरकी हुई है। भारत की ओर तालिबान का झुकाव पाकिस्तान की रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है।
कूटनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अफगानिस्तान में शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचा और मानवीय सहायता के क्षेत्र में बड़ा निवेश किया है। अब तालिबान के साथ राजनयिक रिश्ते बहाल होने से नई रणनीतिक साझेदारी की संभावना बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, “तालिबान का भारत के साथ संबंध सुधारना पाकिस्तान के प्रभाव क्षेत्र से बाहर निकलने की दिशा में बड़ा कदम है।”
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