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देश में उभरता ‘प्रोफेशनल आतंकवाद’, एक नया और खतरनाक दौर: हेमंत उपाध्याय
17 नव, 2025 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
Hemant upadhyay

Hemant upadhyay

Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

लाल किले के पास हुए धमाके और उसके बाद देश के विभिन्न राज्यों में हुई कार्रवाई ने आतंकवाद के एक नए, बेहद संगठित और ‘प्रोफेशनल’ स्वरूप का चेहरा उजागर किया है। हरियाणा के फरीदाबाद में लगभग 2,900 किलोग्राम आईईडी बनाने की सामग्री मिलने ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इसी कड़ी में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इंटर-स्टेट और इंटरनेशनल स्तर पर सक्रिय एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए दो डॉक्टरों को गिरफ्तार किया। 

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से डॉ. आदिल अहमद राथर, और फरीदाबाद से डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई की गिरफ्तारी के बाद एक महिला डॉक्टर की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, ये गिरफ्तार व्यक्ति प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा थे। इसके बाद हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में कई ठिकानों से जांच एजेंसियों ने ऐसे और लोगों को पकड़ना शुरू किया जो एक ही प्रोफेशन (डॉक्टर) से जुड़े हुए पाए गए। डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन, डॉ. उमर, डॉ. आदिल आदि के बाद भी गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है। कुछ रिपोर्टों में यह भी आशंका जताई जा रही है कि उत्तर प्रदेश में ही कई सौ प्रोफेशनल्स सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर हो सकते हैं। वहीं, फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर भी गंभीर जांच चल रही है।

 

आतंकवाद अब अपने नए चरण में कर चुका है प्रवेश 

यह घटनाएं बताती हैं कि भारत में आतंकवाद अब अपने नए चरण में प्रवेश कर चुका है। पहले जिन आतंकियों की छवि पहाड़ों और जंगलों में छिपे बंदूकधारी युवकों की होती थी, आज वह बदल रही है। अब उच्च शिक्षित, तकनीकी कौशल से लैस, पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स इस नेटवर्क का हिस्सा बनते दिख रहे हैं।

 

आतंकवाद का चेहरा अशिक्षित या बेरोजगार युवाओं तक ही सीमित नहीं

अतिवाद और आतंकवाद का चेहरा केवल अशिक्षित या बेरोजगार युवाओं तक सीमित नहीं है। देश और दुनिया में पहले भी इस तरह के उदाहरण सामने आए हैं।

 

- अमेरिका पर हमला करने वाले युसूफ शेख (इंजीनियर) और मोहम्मद बिन अट्टा (पायलट)

 

- संसद हमले में शामिल अफज़ल गुरु (अध्यापक)

 

- 1993 मुंबई विस्फोट के दोषी याकूब मेनन (चार्टर्ड अकाउंटेंट)

 

देश की सुरक्षा एजेंसियों के सामने उभरी नई चुनौतियां

आज भारत में डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे पेशेवरों के आतंकी मॉड्यूल में शामिल होने की आशंका ने सुरक्षा एजेंसियों को नई चुनौती दी है। देश की सुरक्षा एजेंसियां उत्कृष्ट काम कर रही हैं, पर बदलते हालात बताते हैं कि अब लड़ाई केवल सीमाओं पर नहीं है। यह एक साइकोलॉजिकल, टेक्निकल और नेटवर्क-आधारित युद्ध बन चुका है।

 

बदली चुनौतियों के बीच अब इन बातों की जरूरत है

 

- समाज का हर व्यक्ति की जागरूकता जरूरी है।

 

- संस्थाओं, संगठनों और कार्यकर्ताओं को सुरक्षा-केन्द्रित प्रशिक्षण दिया जाए।

 

- शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा प्रोटोकॉल की मजबूती जरूरी।

 

- संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल रिपोर्टिंग जरूरी है।

 

- टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और निगरानी प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण पर जोर देना जरूरी।

 

नया मॉड्यूल अधिक खतरनाक इसलिए है- 

 

1. इसके सदस्य उच्च शिक्षित हैं।

2. वे तकनीकी रूप से सक्षम हैं।

3. वे अपनी पहचान आसानी से छिपा सकते हैं।

4. वे सिस्टम की बारीकियों से भलीभांति परिचित होते हैं।

 

पूरा समाज सक्रिय भूमिका निभाए, यही समय की मांग 

आतंकवाद से निपटने की रणनीति में अब आम जनता से लेकर संस्थानों तक सभी को शामिल करना होगा। और यह समझना होगा कि आतंकवाद अब किसी खास वर्ग या पहचान से नहीं, बल्कि कट्टरता और वैचारिक उग्रता से पैदा होता है, जो किसी भी व्यक्ति को अपने जाल में फंसा सकती है। भारत एक नए प्रकार के खतरे का सामना कर रहा है, वह है-‘हाइली प्रोफेशनल टेररिज़्म’। इससे मुकाबले के लिए सिर्फ सुरक्षा एजेंसियां ही नहीं, बल्कि पूरा समाज सक्रिय भूमिका निभाए, यही समय की मांग है। यदि देश का हर नागरिक जागरूक, प्रशिक्षित और सतर्क होगा, तो ये नए, संगठित और पेशेवर आतंकी तंत्र सफल नहीं हो पाएंगे।

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