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आवारा कुत्तों के हमलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा – बच्चे-बुजुर्गों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
13 जन, 2026 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
आवारा कुत्तों के हमलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा – बच्चे-बुजुर्गों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

आवारा कुत्तों के हमलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा – बच्चे-बुजुर्गों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

सुबह-सुबह स्कूल जाते बच्चे, मोहल्ले में टहलते बुजुर्ग और अचानक पीछे से झुंड में दौड़ते आवारा कुत्ते… यह तस्वीर अब कई शहरों में आम हो चुकी है। लेकिन अब इस खतरे पर देश की सर्वोच्च अदालत ने खुलकर नाराजगी जताई है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि आवारा कुत्तों के हमलों से बच्चों और बुजुर्गों की जान को जो खतरा है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने चेताया कि अब इस मुद्दे पर जिम्मेदारी तय होगी और जरूरत पड़ी तो मुआवजे का भारी बोझ भी राज्यों पर डाला जाएगा।


‘कुत्तों में खतरनाक वायरस, इलाज तक नहीं’ – कोर्ट की चिंता

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने सुनवाई के दौरान एक बेहद गंभीर पहलू की ओर इशारा किया। कोर्ट ने कहा कि कुत्तों में एक खास तरह का वायरस पाया जाता है, जिसका फिलहाल कोई इलाज नहीं है। इसी से जुड़े उदाहरण के तौर पर रणथंभौर नेशनल पार्क का जिक्र किया गया, जहां कुत्तों को काटने वाले बाघ एक लाइलाज बीमारी से संक्रमित पाए गए थे। कोर्ट की यह टिप्पणी साफ बताती है कि मामला सिर्फ सड़क पर घूमते कुत्तों का नहीं है, बल्कि यह इंसानों से लेकर वन्यजीवों तक के लिए खतरे की घंटी है। अगर समय रहते इस पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।


‘9 साल के बच्चे पर हमला हुआ, जिम्मेदार कौन?’ – तीखा सवाल

सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने बेहद भावुक और सीधा सवाल किया, “जब 9 साल के बच्चे पर कुत्ते हमला करते हैं तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?” उन्होंने आगे कहा कि क्या वह संगठन जिम्मेदार होगा जो कुत्तों को खुले में खाना खिला रहा है? या फिर हम आंख मूंदकर इस समस्या को देखते रहेंगे? कोर्ट का मानना है कि सिर्फ दया के नाम पर सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाना समस्या का हल नहीं है। इससे कुत्तों के झुंड बढ़ते हैं, वे आक्रामक होते हैं और आम लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ती है।


डॉग लवर्स को दो टूक – ‘खाना खिलाते हैं तो घर ले जाएं’

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर डॉग लवर्स को भी आड़े हाथों लिया। बेंच ने कहा कि जो लोग खुले में कुत्तों को खाना खिला रहे हैं, उन्हें चाहिए कि वे उन कुत्तों को अपने घर ले जाएं। कोर्ट की टिप्पणी थी, “अगर आप सच में जानवरों से प्यार करते हैं तो उन्हें सड़क पर बेसहारा छोड़कर लोगों के लिए खतरा मत बनाइए।” कोर्ट ने यह भी कहा कि जो लोग दावा करते हैं कि वे कुत्तों की मदद कर रहे हैं, उनसे पूछा जाना चाहिए कि फिर वही कुत्ते गंदगी क्यों फैला रहे हैं, लोगों को क्यों काट रहे हैं और बच्चों-बुजुर्गों को क्यों डरा रहे हैं।


हर मौत और घायल होने पर राज्य सरकार से वसूला जाएगा मुआवजा

इस पूरे मामले में सबसे सख्त चेतावनी राज्य सरकारों के लिए आई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी बच्चे या बुजुर्ग की मौत कुत्ते के काटने से होती है या कोई गंभीर रूप से घायल होता है, तो राज्य सरकार के खिलाफ भारी मुआवजा तय किया जाएगा। कोर्ट ने माना कि अभी तक सरकारें इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखा रही हैं। नगर निगम, पंचायत और संबंधित विभागों के बीच तालमेल की कमी की वजह से समस्या जस की तस बनी हुई है।


अब सिर्फ बहाने नहीं, ठोस कार्रवाई की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक तरह से अलार्म है। देश के बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक आवारा कुत्तों का आतंक आम बात हो चुका है। बच्चों का अकेले स्कूल जाना डर का कारण बन गया है और बुजुर्ग सुबह की सैर से पहले दस बार सोचते हैं। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकारें और नगर निकाय इस सख्ती को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या नसबंदी अभियान तेज होंगे? क्या कुत्तों को सुरक्षित शेल्टर में रखने की व्यवस्था बनेगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। 


फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का यह रुख आम लोगों के लिए राहत की खबर है। उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले दिनों में सड़कों पर घूमते इन खतरों से निजात मिलेगी और बच्चे-बुजुर्ग बिना डर के अपनी जिंदगी जी सकेंगे।

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