
नई दिल्ली। अमेरिका में टैरिफ को लेकर उठे बड़े फैसलों के बीच भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर तस्वीर लगभग साफ हो गई है। नए ग्लोबल टैरिफ के ऐलान के बावजूद दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौता तय समय पर आगे बढ़ेगा, जिससे भारतीय निर्यात सेक्टर को राहत मिलने की उम्मीद है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रम्प का नया टैरिफ ऐलान
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ रद्द करने के फैसले के कुछ ही घंटों बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनियाभर पर 10% ग्लोबल टैरिफ लागू करने की घोषणा कर दी। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार बाजार में हलचल बढ़ा दी, क्योंकि कई देशों के साथ चल रही बातचीत पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी। हालांकि ट्रम्प ने साफ किया कि भारत के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील अपनी मौजूदा शर्तों के साथ आगे बढ़ती रहेगी।
भारत पर कुल टैरिफ कितना रहेगा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के साथ समझौता करने वाले देशों पर अब धारा 122 के तहत 10% ग्लोबल टैरिफ लागू होगा। इससे पहले भारत के लिए करीब 18% टैरिफ की चर्चा थी। नई स्थिति में माना जा रहा है कि भारत पर कुल टैरिफ घटकर 10% तक रह सकता है, हालांकि यह अभी आधिकारिक रूप से पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है कि नया टैरिफ पुराने ढांचे में कैसे शामिल किया जाएगा।
फरवरी के अंत तक फाइनल होगी अंतरिम ट्रेड डील
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता फरवरी के आखिर तक अंतिम रूप ले सकता है। इसके बाद मार्च में दोनों देश इस पर हस्ताक्षर करेंगे और अप्रैल से इसे लागू करने की तैयारी है। सरकार की रणनीति केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। आने वाले महीनों में ब्रिटेन और ओमान जैसे देशों के साथ भी बड़े व्यापार समझौते शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
23 फरवरी से शुरू होगी अहम बातचीत
भारत और अमेरिका के अधिकारी 23 फरवरी से अमेरिका में तीन दिन की महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इस दौरान कानूनी ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा, जो आगे चलकर अंतिम समझौते का आधार बनेगा। भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई वाणिज्य मंत्रालय के प्रमुख वार्ताकार करेंगे। माना जा रहा है कि इसी प्रक्रिया के दौरान टैरिफ में संभावित कटौती पर अंतिम निर्णय सामने आ सकता है।
किन सेक्टरों को मिलेगा सीधा फायदा?
अगर टैरिफ में कमी लागू होती है तो भारत के कई निर्यात सेक्टरों को बड़ा लाभ मिल सकता है। खासकर टेक्सटाइल, लेदर और जेम्स-ज्वैलरी इंडस्ट्री को अमेरिकी बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बढ़त मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ घटने से भारतीय उत्पादों की कीमतें कम होंगी, जिससे निर्यात बढ़ने की संभावना है।
7 फरवरी को क्या तय हुआ था?
इससे पहले 7 फरवरी को घोषित समझौते में भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिका में जीरो टैरिफ पर निर्यात की सुविधा देने की बात कही गई थी। वहीं अमेरिका के कृषि उत्पादों को भारत में कोई अतिरिक्त टैरिफ छूट नहीं दी गई। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया था कि जेनेटिकली मॉडिफाइड फूड को भारत में अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे घरेलू कृषि हितों की सुरक्षा बनी रहे।
बतादें अमेरिका के नए टैरिफ फैसलों के बावजूद भारत-यूएस ट्रेड डील पटरी पर बनी हुई है। अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार और ज्यादा खुल सकता है। आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों और कानूनी ड्राफ्ट से इस समझौते की दिशा पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।
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