
नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार शाम भारत पहुंच चुके हैं। पालम एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया — प्रोटोकॉल को तोड़कर। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब रूस–यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार पुतिन भारत आए हैं। पुतिन इस दौरे में लगभग 30 घंटे ठहरेंगे। यात्रा के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी ने उनके लिए 7, लोक कल्याण मार्ग पर डिनर का आयोजन किया।
क्या हैं एजेंडे में: तेल, रक्षा, व्यापार और रणनीति
23वीं भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन (India–Russia Annual Summit) में कई अहम मुद्दे चर्चा के विषय होंगे। दोनों देश ऊर्जा, रक्षा और आर्थिक साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाना चाहते हैं। खास तौर पर रूस की हथियार प्रणाली, तेल–एनर्जी आपूर्ति, न्यूक्लियर व टेक्नोलॉजी सहयोग, व मुक्त व्यापार समझौते चर्चा के केंद्र में होंगे।
सूत्रों की मानें तो रूस भारत को बेहतर सौदे के साथ ऊर्जा, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग देना चाहता है, ताकि पश्चिम के दबावों और प्रतिबंधों के बावजूद रणनीतिक साझेदारी बनी रहे।
पुतिन–मोदी की बातचीत: शांति की पहल और कूटनीतिक संतुलन
हैदराबाद हाउस में हुई पुतिन–मोदी की बैठक में यूक्रेन युद्ध, वैश्विक सुरक्षा, और भारत की विदेश नीति की अहमियत पर बात हुई। भारत ने स्पष्ट किया कि वो “किसी का नहीं, शांति का पक्ष” है। पुतिन ने इस दौरान भारत की शांति-पहल की सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी समय में जब रूस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव है, भारत-रूस का यह कदम उनकी रणनीतिक साझेदारी और व्यावसायिक द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा।
25 से अधिक समझौतों की तैयारी, डील्स तय हो सकती हैं
दौरे के दौरान अनेक बड़े समझौतों पर मुहर लगनी सामने आ रही है। रक्षा, ऊर्जा, नागरिक परमाणु ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, व्यापार और व्यापार घाटा कम करने के लिए रूस और भारत नए रास्ते तलाश रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन समझौतों का असर सिर्फ 2 देशों पर ही नहीं, बल्कि भू-राजनीति, वैश्विक ऊर्जा बाजार व अंतरराष्ट्रीय राजनयिक समीकरणों पर भी पड़ेगा।
क्या कह रहे विशेषज्ञ और दुनिया
कुछ कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के लिए अब रणनीतिक संतुलन बनाना जरूरी हो गया है — न सिर्फ अमेरिका और पश्चिम से, बल्कि रूस जैसे पुराने दोस्त से भी। विश्व मीडिया भी पुतिन के भारत दौरे को एक महत्त्वपूर्ण संकेत मान रही है कि रूस पश्चिमी दबाव के बाद भी अकेला नहीं है — रूस के लिए भारत अब सबसे भरोसेमंद पार्टनर है।
पुतिन दौरा— भारत-रूस दोस्ती का नया अध्याय
वर्तमान में वैश्विक तनाव, रूस–यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी प्रतिबंध और अमेरिका-भारत संबंधों की नाजुक स्थिति के बीच पुतिन का भारत दौरा सिर्फ एक रस्मी मुलाकात नहीं है। यह संकेत है कि भारत अपनी विदेश नीति में “स्वतंत्र, रणनीतिक और संतुलित” कदम बरकरार रखना चाहता है।
अगर इस दौरे में 25+ समझौतों पर कामयाबी मिलती है, तो आने वाले सालों में भारत-रूस साझेदारी सिर्फ रक्षा और ऊर्जा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि व्यापार, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा व आर्थिक साझेदारी के नए मुकाम तय करेगी।
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