
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को तिरुवनंतपुरम में 55 मिनट के भाषण के दौरान केरल की राजनीति को लेकर बड़ा संकेत दे दिया। उन्होंने कहा कि “केरल में मुझे नई उम्मीद दिख रही है। आपका जोश यह विश्वास दिलाता है कि अब यहां बदलाव होकर रहेगा।” मोदी ने साफ कहा कि यहां का “लेफ्टिस्ट इको सिस्टम” उनकी बातों से असहज हो सकता है, लेकिन वे मजबूती से तर्क और तथ्यों के साथ अपनी बात रखेंगे।
तिरुवनंतपुरम को ‘अहमदाबाद’ क्यों बताया?
पीएम मोदी ने अपने राजनीतिक सफर की तुलना करते हुए कहा कि जैसे अहमदाबाद से गुजरात में बीजेपी को नई पहचान मिली, वैसे ही तिरुवनंतपुरम से केरल में पार्टी की मजबूत नींव पड़ी है।
अहमदाबाद से गुजरात में सत्ता तक का सफर
गुजरात राज्य का गठन: 1 मई 1960
पहले विधानसभा चुनाव: 1962
1960 से 1995 तक कांग्रेस का शासन
बीजेपी का टर्निंग पॉइंट: 1987 में अहमदाबाद नगर निगम में जीत
1990 में संयुक्त सरकार (जनता दल + BJP)
1995 में पहली बार पूर्ण बहुमत से बीजेपी सरकार
तब से आज तक बीजेपी गुजरात की सत्ता में है
मोदी ने कहा कि जैसे अहमदाबाद ने बीजेपी को गुजरात में स्थापित किया, वैसे ही तिरुवनंतपुरम के नतीजे केरल में बदलाव का संकेत हैं।
तिरुवनंतपुरम से केरल में बीजेपी की एंट्री
9 दिसंबर को आए नगर निगम चुनावों में बीजेपी ने इतिहास रच दिया।
101 वार्डों में से 50 पर जीत
45 साल से काबिज LDF को बड़ा झटका
LDF: 29 वार्ड
UDF (कांग्रेस गठबंधन): 19 वार्ड
केरल के इतिहास में पहली बार बीजेपी का मेयर
यह वही तिरुवनंतपुरम है, जो कांग्रेस सांसद शशि थरूर का गढ़ माना जाता है।
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