
नई दिल्ली। अगर कोई शख्स आपको बार-बार याद करे, सपनों तक में नाम ले और फोन करता रहे, तो जाहिर है या तो वह आपका पुराना दीवाना होगा या फिर आप पर किसी किस्म का जुनून सवार होगा। कुछ ऐसा ही जुनून इस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिखाई दे रहा है। पिछले 100 दिनों में ट्रंप 55 बार भारत और मोदी का नाम ले चुके हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने दावा किया कि फोन करके उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाया था, और धमकी दी थी कि अगर जंग नहीं रुकी तो अमेरिका कोई व्यापारिक समझौता नहीं करेगा।
ट्रंप का विवादित दावा
ट्रंप ने मंगलवार को कहा, "मैंने पीएम मोदी से कहा कि अगर पाकिस्तान के साथ जंग नहीं रुकी तो कोई व्यापार समझौता नहीं होगा। फिर मैंने पाकिस्तान से कहा कि अगर लड़ाई बंद नहीं हुई तो इतने ऊंचे टैरिफ लगाऊंगा कि उनका सिर घूम जाएगा। इसके बाद पांच घंटे में सब खत्म हो गया।" इससे एक दिन पहले भी ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने 24 घंटे का अल्टीमेटम देकर भारत-पाक युद्ध रोका और इसमें 7 जेट मार गिराए गए थे।
मोदी से "फोन कनेक्शन" की बेचैनी
जर्मन अखबार की रिपोर्ट कहती है कि ट्रंप ने मोदी को कम से कम चार बार फोन लगाया, लेकिन पीएम मोदी ने रिस्पॉन्ड नहीं किया। इसी से उनकी बेचैनी और बढ़ गई।
सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने ट्रंप की तुलना उस पजेसिव गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड से की, जो ब्रेकअप के बाद भी चैन से नहीं रह पाता।
विशेषज्ञ कहते हैं कि अमेरिका जहां दुनिया का सबसे ताकतवर और अमीर देश है, वहीं भारत अभी भी विकासशील श्रेणी में है और 2045 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखता है। ऐसे में ट्रंप का भारत के पीछे इतना समय देना कई लोगों को हैरान कर रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद 40 बार भारत का जिक्र
India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर (7-10 मई 2025) के बाद से अब तक ट्रंप ने कम से कम 40 बार यह दावा किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाया। 10 मई, 18 जून और 27 अगस्त की व्हाइट हाउस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत का नाम लिया। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के साथ मुलाकात के दौरान भी भारत का जिक्र किया। टैरिफ पर बयान देते वक्त उन्होंने कम से कम 15 बार मोदी का नाम लिया।
अमेरिका-भारत की पोज़िशन: क्यों बढ़ी अहमियत?
कुछ दशक पहले तक भारत को अमेरिकी राष्ट्रपति गंभीरता से नहीं लेते थे। 1970-80 के दशक में भारतीय प्रधानमंत्रियों को वॉशिंगटन बुलाकर घंटों इंतजार करवाया जाता था। एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स ने भारत में iPhone लांच करने से मना कर दिया था, क्योंकि उन्हें लगता था कि भारत उनकी ब्रांड वैल्यू घटा देगा।
लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है
भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। जी-20 और BRICS जैसे मंचों पर भारत की भूमिका अहम है। रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन से तनाव के बीच अमेरिका के लिए भारत एक रणनीतिक साझेदार बन चुका है।
भारत की बढ़ती ताकत का संकेत
हालांकि ट्रंप की यह बेचैनी और "भारत-प्रेम" इस बात का भी प्रमाण है कि अब भारत को दुनिया की राजनीति में हल्के में नहीं लिया जा सकता। अमेरिका को भारत से रक्षा सौदों और टेक्नोलॉजी सहयोग की जरूरत है। भारत चीन के मुकाबले अमेरिका का संभावित बैलेंस बन चुका है। मोदी की लोकप्रियता और भारत की भूमिका वैश्विक मंच पर इतनी बढ़ गई है कि ट्रंप जैसे नेता भी बार-बार भारत का नाम लेने को मजबूर हैं।
क्या ट्रंप की मानसिक स्थिति बिगड़ रही है?
ट्रंप के बयान अब विरोधाभासी होते जा रहे हैं, कभी कहते हैं 7 जेट गिरे, तो कभी 5 जेट। कभी कहते हैं भारत-पाक युद्ध 1500 साल पुराना है, तो कभी सैकड़ों साल। ट्रम्प यहीं नहीं रुके तेजी से बढ़ने वाली भारत की अर्थव्यवस्था को उन्होंने “मृत अर्थव्यवस्था” तक कह डाला।
साइकॉलजी टुडे की रिपोर्ट और The Dangerous Case of Donald Trump (2017) के विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप में नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के लक्षण हैं और यह अमेरिका के लिए खतरा साबित हो सकता है।
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