
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए प्रत्याशी सीपी राधाकृष्णन की जीत किसी को चौंकाने वाली नहीं थी। शुरू से ही एनडीए के पास नंबर थे, विपक्ष केवल राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने में लगा रहा। कांग्रेस और उसके साथियों ने हार की आहट मिलते ही यह कहना शुरू कर दिया कि “हमारे लिए यह नैतिक जीत होगी।” लेकिन जब नतीजे सामने आए, तो साफ हो गया कि यह विपक्ष की रणनीतिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर करारी हार है।
विपक्षी एकजुटता की हवा निकली
कांग्रेस का दावा था कि विपक्ष के सारे 315 वोट उसके खाते में जाएंगे। मगर गिनती हुई तो विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को सिर्फ 300 वोट मिले। इसका मतलब साफ है कि विपक्ष टूट गया। 15 सांसदों ने क्रॉस वोटिंग कर दी। माना जा रहा है कि एनडीए खेमे ने आम आदमी पार्टी (AAP) और शिवसेना (UBT) में सेंध लगाई। विपक्ष का यह दावा भी ध्वस्त हो गया कि “क्रॉस वोटिंग एनडीए से हमारे पक्ष में होगी।”
तटस्थ दलों को साधने में नाकाम
कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक ने कई तटस्थ दलों पर भरोसा जताया था। लेकिन वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने खुलकर एनडीए का समर्थन कर दिया। वहीं, बीजेडी, अकाली दल और भारत राष्ट्र समिति (BRS) जैसे दल मतदान से अलग हो गए, जिससे परोक्ष रूप से एनडीए को फायदा मिला।
यानी विपक्ष के दावे हवाई साबित हुए और रणनीति पूरी तरह फेल हो गई।
तमिल प्राइड का मौका गंवाया
एनडीए ने विपक्ष से भी अपील की थी कि वे तमिलनाडु के वरिष्ठ नेता सीपी राधाकृष्णन का समर्थन करें।
क्योंकि अगले साल तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने हैं और अगर विपक्ष ने समर्थन दिया होता, तो कम से कम यह कहने का मौका मिलता कि “हमने एक तमिल को देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचाने में सहयोग किया।”
लेकिन, डीएमके और कांग्रेस ने इस मौके को गंवा दिया।
विपक्ष को 'न माया मिली, न राम'
कांग्रेस ने तेलुगू बैकग्राउंड वाले बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया, ताकि टीडीपी और जनसेना पार्टी को अपने पक्ष में ला सके। कांग्रेस को उम्मीद थी कि एनडीए में सेंध लगेगी। लेकिन हुआ उल्टा — टीडीपी और जनसेना डटे रहे और वाईएसआरसीपी ने सीपी राधाकृष्णन का समर्थन कर कांग्रेस को बड़ा झटका दे दिया। रही-सही कसर बीआरएस ने पूरी कर दी, जिसने मतदान से दूरी बनाई।
संविधान वाले नैरेटिव का बेड़ा गर्क
कांग्रेस को लगा था कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को उतारकर वह “संविधान बचाओ” वाले नैरेटिव को धार देगी।
मगर बीजेपी ने पलटवार किया।
सलवा जुडूम पर रेड्डी के फैसले को नक्सली हिंसा पीड़ितों के सामने उछाला।
रेड्डी की लालू यादव के साथ तस्वीर ने विपक्ष की और किरकिरी कर दी।
कई पूर्व जजों ने भी सवाल उठाए कि “940 करोड़ रुपये के घोटाले में सजा पाए व्यक्ति के साथ सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज का फोटो क्यों?”
इससे कांग्रेस का पूरा प्लान चौपट हो गया।
पिछली बार से बेहतर, लेकिन…
कांग्रेस अब यह कह रही है कि विपक्षी उम्मीदवार को इस बार 40% वोट मिले, जबकि पिछली बार केवल 26% वोट ही थे। लेकिन सच यह है कि पिछली बार एनडीए के पास लोकसभा में 353 सांसद थे। इस बार सिर्फ 293 सांसद हैं। यानी सीटें घटीं, लेकिन विपक्ष फिर भी अपनी स्थिति सुधारने के बजाय और कमजोर साबित हुआ।
विपक्ष की साख पर चोट
इस उपराष्ट्रपति चुनाव ने साफ कर दिया कि इंडिया ब्लॉक की एकजुटता सिर्फ बयानबाजी है। क्रॉस वोटिंग ने विपक्षी दलों की निष्ठा पर सवाल खड़े कर दिए। तटस्थ दलों ने एनडीए का परोक्ष समर्थन किया। रणनीति और उम्मीदवार चयन दोनों ही कांग्रेस के लिए भारी साबित हुए। नतीजा यह हुआ कि सीपी राधाकृष्णन न केवल उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचे, बल्कि एनडीए ने विपक्ष की साख और रणनीति दोनों को मात दे दी।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

