
पटना। बिहार की राजनीति लंबे समय से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन अब उनका राज्यसभा का टिकट स्वीकार करना राज्य की सियासत में बड़ा बदलाव लेकर आया है। गुरुवार को नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गईं। करीब दो दशकों तक बिहार की सत्ता का चेहरा रहे नीतीश कुमार के इस कदम के बाद अब राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री बनने की संभावना मजबूत हो गई है।
अब बीजेपी के सामने सबसे बड़ा सवाल: कौन होगा नया सीएम?
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद सत्ता समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बीजेपी बिहार की कमान किस नेता को सौंपेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से जहां नीतीश कुमार की संसदीय राजनीति में नई भूमिका तय हो गई है, वहीं राज्य में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया भी लगभग तय मानी जा रही है। ऐसे में बीजेपी को मुख्यमंत्री का चेहरा तय करना होगा, जबकि जेडीयू के सामने उपमुख्यमंत्री के लिए नया चेहरा चुनने की चुनौती होगी।
बिहार में अब तक कैसा रहा सत्ता का फॉर्मूला?
- बिहार की राजनीति में बीजेपी और जेडीयू के बीच सत्ता का एक खास फॉर्मूला लंबे समय से चलता रहा है।
- 2005 से 2013 तक बीजेपी सरकार में एक डिप्टी सीएम के साथ साझेदारी करती रही।
- 2017 के बाद जब फिर से गठबंधन बना, तो बीजेपी ने मुख्यमंत्री पद नीतीश कुमार को दिया और बदले में दो डिप्टी सीएम बनाए।
अब जब स्थिति बदल रही है और बीजेपी का मुख्यमंत्री बनने की चर्चा है, तो यह भी सवाल उठ रहा है कि जेडीयू को उपमुख्यमंत्री का एक पद मिलेगा या दो।
सीएम पद की रेस में कौन-कौन?
बीजेपी के अंदर कई बड़े नेता मुख्यमंत्री पद की संभावित दौड़ में माने जा रहे हैं।
1. सम्राट चौधरी
वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को इस दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वे पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के काफी करीबी माने जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का भरोसा भी उनके पक्ष में एक बड़ा फैक्टर माना जा रहा है।
2. नित्यानंद राय
दूसरा प्रमुख नाम नित्यानंद राय का है, जो फिलहाल केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री हैं। वे भी अमित शाह के करीबी माने जाते हैं और लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। बिहार की राजनीति में उनका मजबूत संगठनात्मक आधार भी माना जाता है।
नीतीश कुमार की खास राजनीतिक पहचान
नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में ऐसे नेता माने जाते हैं जो सत्ता और विपक्ष दोनों के साथ संतुलन बनाने की क्षमता रखते हैं। बीजेपी के साथ गठबंधन में रहने के बावजूद उन्हें राज्य में मुस्लिम समुदाय के बीच भी समर्थन मिलता रहा है। इसी वजह से उनका राज्यसभा जाना केवल एक व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय नहीं बल्कि पूरे राज्य के सत्ता समीकरण को बदलने वाला कदम माना जा रहा है।
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