
डेस्क रिपोर्टर
News World Deskनई दिल्ली, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क। Diesel-Petrol Price: दीपावली से ठीक एक दिन पहले केंद्र सरकार ने डीजल पर 10 रुपए और पेट्रोल पर 5 रुपए एक्साइज ड्यूटी कम करने का ऐलान किया। कल से देशभर में नई कीमतें लागू हो चुकी है। वहीं अब इस फैसले को लेकर कई सवाल भी उठ रहे है। जैसे दाम कम करने का फैसला सरकार ने इस समय क्यों लिया? कई राज्यों में होने वाले विधानसभा के चुनाव को लेकर क्या यह फैसला लिया गया है? क्या इससे महंगाई कम होगी?
क्यों घटाने पड़े सरकार को डीजल-पेट्रोल के दाम?
डीजल और पेट्रोल की बढ़ी कीमतों का असर सीधा महंगाई पर पड़ता है। इससे ग्रोथ रेट (Growth Rate) प्रभावित होती है। इसलिए जरूरी था कि केंद्र सरकार महंगाई कम करने के लिए कीमतों में कटौती करे। देश के जाने-माने एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा के मुताबिक कोरोना के चलते इकोनॉमिक एक्टिविटी (Economic Activity) पूरी तरह से ठप हो गई थी। डीजल और पेट्रोल की खपत मात्र 35% के आस-पास ही रह गई थी। ऐसे में सरकार के पास रेवेन्यू बहुत कम आ रहा था। लॉकडाउन के चलते अधिकतर देशों में क्रूड ऑयल के दाम भी काफी कम हो गए थे। ऐसे में रेवेन्यू बढ़ाने के चलते दाम कम करने की जगह सरकार ने दाम बढ़ा दिए थे।
6 सालों में 250% बढ़ी एक्साइज ड्यूटी
केंद्र सरकार ने मार्च से लेकर मई-2020 के बीच डीजल पर 16 रुपए और पेट्रोल पर 13 रुपए एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) बढ़ाई थी। जो डीजल पर बढ़ कर 28.35 रुपए और पेट्रोल पर बढ़ कर 32.98 रुपए प्रति लीटर हो गया था। केंद्र सरकार ने बीते 6 सालों में करीब 250% एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई। डीजल पर साल 2014 में यह ड्यूटी 3.56 रुपए और पेट्रोल पर 9.48 रुपए प्रति लीटर थी। जो अब डीजल पर बढ़ कर 21.80 रुपए और पेट्रोल पर 27.90 हो गई है।
इकोनॉमी सुधरी इसलिए रेवेन्यू बढ़ा
नरेंद्र तनेजा के मुताबिक अब देश की अर्थव्यवस्था में सुधार के साथ रेवेन्यू भी बढ़ रहा है। अपनी योजनाओं को अब सरकार आसानी चलाने की स्थिति में है। इकोनॉमिक इंडिकेटर्स के सुधरने और जीएसटी कलेक्शन बढ़ने के बाद सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती का ऐलान किया। तनेजा का कहना है कि डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ने के कारण सरकार महंगाई बढ़े से चिंतित थी। खानपान से लेकर ट्रांसपोर्टेशन सब के दाम बढ़ रहे थे। यही कारण है कि सरकार ने महंगाई से आम आदमी को कुछ राहत दी है।
कटौती से कितना असर पड़ेगा सरकार की कमाई पर?
एक अनुमान के मुताबिक एक्साइज कटौती से FY22 के बचे हुए 5 महीनों में सरकार की कमाई में करीब 55 हजार करोड़ रुपए कम होगी। तनेजा का कहना है कि कोरोना के समय सरकार ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी थी, अब डीजल और पेट्रोल की खपत कोरोना से पहले जैसी होती थी वैसी ही हो रही है। ऐसे में वापस से रेवेन्यू बढ़ा है। इसके चलते एक्साइज में कटौती करने से सरकार की कमाई पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
क्या चुनाव के चलते कम हुए दाम?
कुछ लोगों का मानना है कि चुनाव को देखते हुए सरकार ने डीजल और पेट्रोल के दाम घटाए है। बीते चुनावों पर नजर डाले तो ईंधन के दामों और चुनाव का कुछ कनेक्शन तो नजर जरूर आता है। 2020 में दिल्ली के विधानसभा चुनाव के दौरान 12 जनवरी से 23 फरवरी तक डीजल और पेट्रोल के दाम नहीं बढ़े थे। 2018 में मई के कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले लगातार 19 दिनों तक दामों में किसी प्रकार का बदलाव देखने नहीं मिला था। 2017 में 5 राज्यों में विधानसभा के चुनाव थे, लेकिन दामों में किसी प्रकार के बदलाव नहीं देखे गए। जबकि उस समय हर 15 दिन में कीमतें बदल रही थी। दिसंबर 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान भी पेट्रोल-डीजल के दाम भी करीब 14 दिन नहीं बढ़े।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

