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डेस्क रिपोर्टर
लंदन, न्यूज वर्ल्ड डेस्क। Facebook की पूर्व कर्मचारी फ्रांसेस हौगेन (Frances Haugen) यूरोप के पार्लियामेंट में जा कर फेसबुक पर नए खुलासे कर सकती हैं। यूरोप के सांसद फ्रांसेस हौगेन से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बारे में खुली चर्चा करेंगे। यूरोपियन यूनियन इस चर्चा के द्वारा यूरोप में इंटरनेट के यूजेस को सेफ करना चाहते हैं।
क्या है यूरोपियन यूनियन में चर्चा के कारण
डेनमार्क के डिजिटल सेवा अधिनियम के प्रमुख क्रिस्टेल शाल्डेमोस ने जानकारी दी कि, जो लोग फेसबुक का इस्तेमाल करते है उन्हें फेसबुक को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए। लोगों को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि फेसबुक बिजनेस प्लेटफॉर्म और संचालन का क्या तरीका है।
जर्मनी की डिजिटल मार्केट एक्ट की प्रमुख एंड्रियास श्वाब ने जानकारी दी कि फेसबुक आज के टाइम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह सोशल मीडिया साइट पर हमारे पर्सनल डेटा के आधार पर राजनीती के विज्ञापन और उससे जुड़ी सामग्री को दिखाता है।
कौन हैं फ्रांसेस हौगेन
व्हिसलब्लोअर फ्रांसेस हौगेन पहले फेसबुक में डेटा एनालिस्ट रह चुकी हैं। कंपनी की नौकरी छोड़ने के बाद हौगेन सोशल मीडिया साइट के बारे में बड़े खुलासे कर रही हैं। हौगेन ने इससे पहले भी खुलासा किया था कि फेसबुक पर अरबी में 'मेड्स' और 'खादीमा' सर्च करने पर दक्षिण एशियाई और अफ्रीकियों महिलाओं की आयु और उनकी फोटोज कीमत के साथ लिस्टेड रहती हैं। इन फोटो को कोई भी यूजर्स अपनी पसंद के हिसाब से हायर कर सकता है।
क्या भारत में ‘Fakebook’ की शक्ल ले चुका "Facebook"
हौगेन ने कहां था कि भारत में फेसबुक का प्लेटफॉर्म ‘फेकबुक’ (फर्जी सामग्री की पुस्तक) की रूप लेता जा रहा है। हौगेन ने कई इनफॉर्मेशन भी शेयर कि थी। इसके आधार पर ही वे लगातार फेसबुक की अंदरूनी खामियों, कार्य-संस्कृति आदि से जुड़े खुलासे कर रही हैं। उनके जारिए सार्वजनिक किए गए ‘फेसबुक पेपर्स’ कि माने तो भारत में फर्जी अकाउंट्स से झूठी खबरों के द्वारा चुनावों को प्रभावित किया जाता है।
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