
वाशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार जगत को झटका देते हुए फार्मास्यूटिकल्स पर बड़े टैरिफ की घोषणा की है। वाशिंगटन में आयोजित नेशनल रिपब्लिकन कांग्रेसनल कमेटी के डिनर कार्यक्रम में बोलते हुए ट्रंप ने कहा, “हम बहुत जल्द फार्मास्यूटिकल सेक्टर पर बड़ा टैरिफ लगाने जा रहे हैं।” यह घोषणा ऐसे वक्त पर हुई है, जब कुछ ही दिन पहले लागू हुए रेसिप्रोकल टैरिफ के असर से दुनिया अभी उबर नहीं पाई है।
भारत, जो अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है, के लिए यह खबर बेहद चिंताजनक मानी जा रही है। ट्रंप के इस कदम से भारत की दवा कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमजोर पड़ सकती है और निर्यात पर सीधा असर पड़ सकता है।
अमेरिकी बाजार में भारत की मजबूत उपस्थिति खतरे में
भारत हर साल अमेरिका को करीब 12.7 अरब डॉलर की दवाइयाँ निर्यात करता है। इनमें से अधिकतर सस्ती जेनेरिक दवाएं हैं, जो अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम को किफायती बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। हेल्थ रिसर्च फर्म IQVIA के मुताबिक, अमेरिका में हर 10 प्रिस्क्रिप्शनों में से 4 भारतीय कंपनियों की दवाएं होती हैं।
ट्रंप की घोषणा के बाद यह समीकरण बदल सकता है। यदि अमेरिका फार्मा उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाता है, तो भारतीय दवाएं महंगी हो जाएंगी, जिससे अमेरिकी बाजार में उनकी मांग घट सकती है।
भारत पर दोहरी मार: टैरिफ और प्रतिस्पर्धा
भारत पर पहले से ही 26% रेसिप्रोकल टैरिफ लागू हो चुका है। यदि फार्मा सेक्टर पर अलग से टैरिफ लगाया गया, तो यह भारत की फार्मा इंडस्ट्री के लिए दोहरा झटका होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, कम मार्जिन पर काम कर रहीं भारतीय फार्मा कंपनियाँ इन अतिरिक्त लागतों का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पाएंगी, जिससे उनका लाभ और बाजार हिस्सेदारी दोनों प्रभावित होंगे।
वहीं, ट्रंप का दावा है कि इस टैरिफ से अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी कंपनियाँ अमेरिका में ही उत्पादन करने को मजबूर होंगी। उन्होंने कहा, “यह अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए मुक्ति दिवस होगा।”
राजनयिक रास्ता और रणनीतिक विकल्प
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भारत को भी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा। यदि भारत अमेरिका से आयातित दवाओं पर लगाया गया 10.91% टैरिफ हटा देता है, तो शायद अमेरिका फार्मा सेक्टर को टैरिफ से राहत दे। हालांकि, भारत-अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताएं जटिल हैं और इनमें समय लग सकता है।
इसके अलावा भारत को यूरोप, साउथईस्ट एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे नए और उभरते बाजारों पर ध्यान केंद्रित करना होगा, ताकि अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता को कम किया जा सके।
वैश्विक ट्रेड वॉर की आशंका
ट्रंप की नीतियाँ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को अस्थिर करने की दिशा में बढ़ रही हैं। हाल ही में चीन पर 104% तक टैरिफ लगाने के बाद अब फार्मा जैसे अहम सेक्टर पर टैरिफ लगाने की घोषणा, वैश्विक व्यापार में एक नई "ट्रेड वॉर" की चेतावनी है।
इस कदम का असर न केवल भारत पर, बल्कि खुद अमेरिका के मरीजों पर भी पड़ेगा। सस्ती जेनेरिक दवाओं की कीमतें बढ़ने से अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम की लागत और बढ़ सकती है।
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