
नई दिल्ली। भारत (India) और अमेरिका (United States of America) के रिश्ते एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के हालिया बयानों, टैरिफ वॉर, और रूस से तेल न खरीदने की धमकियों के कारण दोनों देशों के बीच रिश्ते में दरार आ गई है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने साफ कर दिया है कि भारत किसी के दबाव में नहीं झुकेगा। लेकिन अब पूर्व अमेरिकी राजदूत रहम इमैनुएल (Rahm Emanuel) ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि ट्रंप ने अपने “घमंड, नोबेल पुरस्कार की चाह और पाकिस्तानी पैसे के लालच” में भारत से संबंध खराब किए।
मोदी के न झुकने से बदल गया ट्रंप का रुख
पिछले कुछ हफ्तों में ट्रंप के सुर नरम पड़े हैं।
उन्होंने कई बार पीएम मोदी को “अच्छा दोस्त” (Good Friend) कहा और भारत की तारीफ भी की।
हालांकि, दोनों देशों के रिश्ते अब भी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौटे हैं। दुनियाभर के एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप की विदेश नीति (Foreign Policy) की सबसे बड़ी नाकामी भारत-अमेरिका संबंधों में आई दरार ही है।
“नोबेल नॉमिनेशन नहीं मिला, इसलिए ट्रंप हुए नाराज़”
पूर्व राजदूत रहम इमैनुएल, जो जापान में अमेरिकी राजदूत रह चुके हैं, ने कहा कि ट्रंप ने अपने अहंकार के चलते भारत से रिश्ते बिगाड़े। “ट्रंप को उम्मीद थी कि पीएम मोदी उन्हें भारत-पाकिस्तान युद्ध रोकने का श्रेय देंगे और शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए नामित करेंगे। जब भारत ने ऐसा नहीं किया, तो ट्रंप नाराज़ हो गए,” — रहम इमैनुएल
दरअसल, ट्रंप ने कई बार सार्वजनिक मंचों पर दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोका था। हालांकि भारत की ओर से बार-बार यह स्पष्ट किया गया कि सीज़फायर में अमेरिका या किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। पीएम मोदी ने खुद ट्रंप से फोन पर कहा था कि भारत और पाकिस्तान के मुद्दे द्विपक्षीय हैं और किसी बाहरी मध्यस्थ की जरूरत नहीं है। इमैनुएल का कहना है कि यही बात ट्रंप के अहंकार पर लगी चोट थी।
पाकिस्तानी पैसे का कनेक्शन — “क्रिप्टो डील” का बड़ा खुलासा
रहम इमैनुएल ने यह भी दावा किया कि ट्रंप के परिवार का पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी बिज़नेस से जुड़ा एक बड़ा सौदा है। “ट्रंप परिवार पाकिस्तान में एक बड़ी क्रिप्टो डील में शामिल है। यह डील उनके परिवार के लिए काफी फायदेमंद है। इसी आर्थिक लाभ के लिए ट्रंप ने भारत से दूरी बनाई,” कई वैश्विक विशेषज्ञों ने भी पहले यह आरोप लगाया था कि ट्रंप की विदेश नीति आर्थिक स्वार्थों और व्यक्तिगत लाभ से प्रभावित रही है।
एक्सपर्ट्स बोले — “यह ट्रंप की विदेश नीति की सबसे बड़ी नाकामी”
विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक और तेजी से उभरते देश से रिश्ते खराब करना, अमेरिका के लिए दीर्घकालिक नुकसान साबित हो सकता है। ट्रंप प्रशासन की “अमेरिका फर्स्ट” नीति ने जहां कुछ देशों के साथ संबंध मजबूत किए, वहीं भारत जैसे रणनीतिक साझेदार से दूरी बढ़ा दी। “ट्रंप ने निजी हितों को राष्ट्रीय हितों से ऊपर रखा। यही उनकी सबसे बड़ी कूटनीतिक भूल है।” — एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी
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