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व्हाइट हाउस में ‘वार रूम’ का हंगामा! ट्रंप चिल्लाए- ‘पुतिन की मान लो वरना यूक्रेन खत्म!’
21 अक्टू, 2025 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
व्हाइट हाउस में ‘वार रूम’ का हंगामा! ट्रंप चिल्लाए- ‘पुतिन की मान लो वरना यूक्रेन खत्म!’

व्हाइट हाउस में ‘वार रूम’ का हंगामा! ट्रंप चिल्लाए- ‘पुतिन की मान लो वरना यूक्रेन खत्म!’

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

यह कोई कूटनीतिक बैठक नहीं थी, बल्कि सदी का सबसे आक्रामक सीन था! व्हाइट हाउस के अंदर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की आमने-सामने थे। कमरे में तनाव ऐसा कि दीवारें भी सुन रही थीं। यूरोपीय सूत्रों ने जो खुलासा किया है, उसने पूरी दुनिया की राजनीति को हिला दिया है।

 ट्रंप ने गुस्से में कहा –“पुतिन की हर शर्त मान लो, वरना यूक्रेन का नामो-निशान मिट जाएगा!” यानी साफ-साफ धमकी कि रूस की मांगों को न मानने की कीमत यूक्रेन को अपनी जमीन से चुकानी होगी।


नक्शे फेंकने का गुस्सा – “ये लाल लाइन क्या बकवास है!”

बैठक का माहौल उस वक्त बिगड़ा जब जेलेंस्की की टीम ने रूस के हमलों के फ्रंटलाइन नक्शे पेश किए। ट्रंप भड़क गए, नक्शे हवा में उछालते हुए बोले –“ये लाल लाइन क्या बकवास है? मैं तो वहां कभी गया ही नहीं!” एक यूरोपीय अधिकारी ने बताया कि ट्रंप बार-बार अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे। जेलेंस्की मिसाइलों की मांग कर रहे थे, लेकिन ट्रंप ने ठंडे स्वर में मना कर दिया। कमरा सन्न हो गया — यूक्रेन की उम्मीदों पर जैसे किसी ने बर्फ डाल दी हो।


पुतिन की शर्तें थोपने की कोशिश

ट्रंप ने यूक्रेन पर ज़ोर डालते हुए कहा कि पूरा डोनबास इलाका रूस को सौंप दो। पहले तो उन्होंने सीमाओं को जस का तस रखने की बात कही, लेकिन जल्द ही पुतिन की ‘मैक्सिमलिस्ट’ मांगों का समर्थन करने लगे।

 उनके शब्द सिहरन पैदा करने वाले थे:“अगर पुतिन चाहेगा, तो वो तुम्हें नेस्तनाबूद कर देगा।” विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का नया चेहरा है, जहां सहयोगी देशों की कीमत पर भी अमेरिकी हित पहले रखे जा रहे हैं।


अमेरिकी मदद पर ट्रंप का “ना”

जेलेंस्की इस उम्मीद से वॉशिंगटन पहुंचे थे कि उन्हें टोमहॉक मिसाइलें और अतिरिक्त सैन्य सहायता मिलेगी।

 लेकिन ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा, “अब कोई मिसाइल नहीं मिलेगी।” यह इनकार केवल हथियारों का नहीं, बल्कि दोस्ती के रिश्ते का भी था। बैठक के बाद जेलेंस्की खामोशी से लौटे, लेकिन यह सवाल अब भी हवा में तैर रहा है —

 क्या अमेरिका अब रूस के पाले में खड़ा हो गया है?


वैश्विक असर और ‘भविष्य का धमाका’

ट्रंप की इस ‘गुप्त बैठक’ ने कूटनीतिक हलकों में भूचाल ला दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इजराइल-हमास संघर्षविराम के बाद ट्रंप अब यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की जल्दबाजी में हैं, लेकिन यह तरीका यूक्रेन के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।

 

क्या यह “डील या धोखा” है?

 दुनिया की निगाहें अब व्हाइट हाउस और क्रेमलिन के बीच की अगली चाल पर टिकी हैं।

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