
कीव/पेरिस। 42 महीने से अधिक समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध ने यूक्रेन में भारी तबाही मचा दी है। हजारों नागरिक और सैनिक मारे जा चुके हैं, जबकि बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है। युद्ध के बीच यूक्रेनी सेना लगातार अंतरराष्ट्रीय समर्थन के दम पर रूसी सैनिकों का मुकाबला कर रही है।
26 देशों का सुरक्षा वादा
हाल ही में पेरिस में आयोजित शिखर सम्मेलन में फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में 26 देशों ने यूक्रेन को युद्ध के बाद सुरक्षा गारंटी देने का वचन दिया। इस पहल को 'Coalition Of The Willing' नाम दिया गया है।
मुख्य बातें:
➡️ युद्ध समाप्त होने के बाद यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सेना भेजने की पेशकश।
➡️ शांति स्थापना के बाद यूक्रेन की जमीनी, हवाई और समुद्री सुरक्षा का आश्वासन।
➡️ भविष्य में रूस द्वारा किसी भी नए हमले पर सैन्य और कूटनीतिक उपायों के माध्यम से जवाब देने की योजना।
रूस की कड़ी प्रतिक्रिया
रूस ने इस योजना की तीव्र आलोचना की है।
➡️ रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे यूरोपीय महाद्वीप के लिए खतरे के रूप में देखा।
➡️ क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, “विदेशी, विशेष रूप से यूरोपीय और अमेरिकी सैनिक निश्चित रूप से यूक्रेन को सुरक्षा का आश्वासन नहीं दे सकते।”
➡️ पेस्कोव ने चेतावनी दी कि यूक्रेन में विदेशी सैनिकों की तैनाती को उकसावे की कार्रवाई माना जाएगा और रूस इसका कड़ा जवाब देगा।
अंतरराष्ट्रीय महत्व
इस कदम से यूक्रेन को न केवल शांति स्थापना में सहायता मिलेगी, बल्कि युद्ध के बाद उसकी सुरक्षा और स्थिरता भी सुनिश्चित होगी। वहीं, रूस की कड़ी प्रतिक्रिया के चलते यूरोप और वैश्विक स्तर पर संभावित तनाव और बढ़ सकता है।
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