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अमेरिका का सख्त संदेश: रूस को झुकाने के लिए बढ़ेंगे टैरिफ, क्या फिर इशारा भारत की ओर था?
08 सित, 2025 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
अमेरिका का सख्त संदेश: रूस को झुकाने के लिए बढ़ेंगे टैरिफ, क्या फिर इशारा भारत की ओर था?

अमेरिका का सख्त संदेश: रूस को झुकाने के लिए बढ़ेंगे टैरिफ, क्या फिर इशारा भारत की ओर था?

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

वॉशिंगटन/कीव/नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका ने रूस को आर्थिक रूप से घेरने की नई रणनीति का संकेत दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रविवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि यूरोपीय संघ को भी आगे आकर अमेरिका का साथ देना चाहिए ताकि रूस पर अधिकतम दबाव बनाया जा सके। बेसेंट ने रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की संभावना जताई है। हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन इस मुद्दे पर भारत अमेरिका की नजरों में सबसे बड़ा लक्ष्य बना हुआ है।


भारत पर पहले से 50% टैरिफ

अमेरिका पहले ही रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा चुका है। इससे भारत पर कुल टैरिफ दर 50% तक पहुंच गई है। अमेरिका ने भारत पर आरोप लगाया कि वह रूस-यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से वित्तपोषित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ने नए टैरिफ और लगाए तो भारत की ऊर्जा नीति और तेल आयात लागत पर सीधा असर पड़ेगा।


"पुतिन को बातचीत की मेज पर आना पड़ेगा"

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सख्त लहजे में कहा, “अब यह दौड़ है कि यूक्रेनी सेना कितने समय तक टिक सकती है और रूसी अर्थव्यवस्था कितने समय तक टिक सकती है। अगर अमेरिका और यूरोपीय संघ रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर और ज्यादा प्रतिबंध व द्वितीयक शुल्क लगा दें, तो रूसी अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी और राष्ट्रपति पुतिन को बातचीत की मेज पर आना ही पड़ेगा।”


यूरोप से मदद की अपील

बेसेंट ने यूरोप पर भी दबाव बनाया और कहा कि रूस को कमजोर करने के लिए सिर्फ अमेरिका की कोशिशें पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हम रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए हमें यूरोप में अपने सहयोगियों की भी जरूरत है।”

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका चाहता है कि यूरोप रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों को लेकर सख्त कदम उठाए, ताकि रूस की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह झटका दिया जा सके।


रूस ने किया अब तक का सबसे बड़ा हमला

अमेरिकी वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस ने रविवार को यूक्रेन की राजधानी कीव में स्थित मुख्य सरकारी परिसर पर बमबारी की। इसे युद्ध की अब तक की सबसे गंभीर वृद्धि माना जा रहा है। यूरोपीय देशों ने इस हमले को “युद्ध में गंभीर वृद्धि” करार दिया और निंदा की है।


भारत की बढ़ी मुश्किलें

भारत रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करता है। लेकिन अमेरिका के बढ़ते टैरिफ दबाव ने भारत की विदेश नीति और ऊर्जा नीति दोनों को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

 

भारत को अब यह संतुलन साधना होगा कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित न करे और साथ ही अमेरिका तथा यूरोपीय देशों के साथ रिश्ते भी न बिगड़े।

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