
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर है। दोनों देशों के तीखे बयानों के बीच अब ईरान की ओर से बड़ा और साफ संदेश सामने आया है। ईरान के सुप्रीम लीडर के भारतीय प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, क्योंकि इस्लाम में इसे ‘हराम’ माना गया है। उन्होंने यह बयान न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में दिया।
परमाणु ऊर्जा केवल मानव कल्याण के लिए
हकीम इलाही ने स्पष्ट किया कि ईरान परमाणु तकनीक का इस्तेमाल केवल शांतिपूर्ण और मानवीय जरूरतों के लिए करना चाहता है। उनका कहना है कि ईरान का मकसद हथियार बनाना नहीं, बल्कि चिकित्सा, ऊर्जा और वैज्ञानिक विकास जैसे क्षेत्रों में इसका उपयोग करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम मानवता के हित में है, न कि युद्ध के लिए।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर लगाए दोहरे मापदंड के आरोप
डॉ. इलाही ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर तो कड़ी निगरानी रखी जाती है और लगातार प्रतिबंध लगाए जाते हैं, लेकिन सभी देशों पर समान नियम लागू नहीं होते। उनके मुताबिक यह स्पष्ट रूप से दोहरा मापदंड है, जो वैश्विक राजनीति में असंतुलन पैदा करता है।
ट्रंप के बयान पर ईरान का जवाब
डोनाल्ड ट्रंप के “धरती के नक्शे से मिटा दिया जाएगा” वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए हकीम इलाही ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। हम पहले भी ऐसी धमकियां सुन चुके हैं और हर स्थिति के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धमकियों से ईरान के रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा।
खामेनेई के शासन पर ट्रंप की टिप्पणी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई के 37 साल पुराने शासन को खत्म करने की बात कही थी। इस पर हकीम इलाही ने कोई सीधी टिप्पणी नहीं की, लेकिन इतना जरूर कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।
इंटरनेट बंद करने पर दी सफाई
ईरान में हाल ही में हुई हिंसा के दौरान इंटरनेट बंद किए जाने को लेकर भी उन्होंने जवाब दिया। हकीम इलाही ने कहा कि शांति बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद की गई थीं, लेकिन देश के भीतर लोकल इंटरनेट सेवाएं चालू रखी गईं। उनका कहना है कि यह कदम सुरक्षा कारणों से उठाया गया था।
हर स्थिति के लिए तैयार है ईरान
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से चाहे जैसी भाषा इस्तेमाल की जाए, ईरान अपनी रक्षा और सम्मान के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका कहना है कि दबाव और धमकियों से ईरान झुकने वाला नहीं है।
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