
अगर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को समय रहते नहीं रोका गया तो बांग्लादेश आने वाले दशकों में जलवायु आपदा का सबसे बड़ा शिकार बन सकता है। एक नए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2100 तक बांग्लादेश का औसत तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जिससे सर्दी का मौसम लगभग खत्म हो जाएगा और देश का जलवायु संतुलन पूरी तरह बदल जाएगा।
18% तटीय भूमि स्थायी रूप से होगी जलमग्न
अध्ययन चेतावनी देता है कि अगर समुद्र का जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो बांग्लादेश की लगभग 18% तटीय भूमि पानी में डूब जाएगी। इसका सबसे ज्यादा असर वहाँ की आबादी, खेती, सुंदरवन और तटीय इकोसिस्टम पर होगा।
2050 तक 9 लाख लोग होंगे विस्थापित
लगातार बढ़ते जलस्तर, तटीय बाढ़ और मौसमीय आपदाओं के चलते 2050 तक करीब 900,000 लोग विस्थापित हो सकते हैं।
ये आंकड़े "बांग्लादेश की भावी जलवायु" शीर्षक से प्रकाशित नई शोध रिपोर्ट में शामिल किए गए हैं।
किसने तैयार की रिपोर्ट?
यह रिपोर्ट बांग्लादेश मौसम विभाग और नॉर्वेजियन मौसम विज्ञान संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई है। इसमें सेव द चिल्ड्रन का तकनीकी सहयोग रहा। रिपोर्ट का नेतृत्व मौसम वैज्ञानिक मोहम्मद बज़लुर राशिद ने किया। रिपोर्ट पांच अलग-अलग जलवायु परिदृश्यों पर आधारित है और इसे दो समय अवधियों — 2041-2070 और 2071-2100 — में विभाजित किया गया है।
पश्चिमी जिलों में पूरे साल झुलसाने वाली गर्मी
रिपोर्ट के अनुसार:
➡️ पश्चिमी जिलों में पूरे साल लू चलने की संभावना
➡️ 2070 के दशक में 20 दिनों तक मानसून-पूर्व लू
➡️ सदी के अंत तक 90 में से 70 दिन लू वाले हो सकते हैं
ढाका में हर साल दो बार पड़ेगी भीषण गर्मी
राजधानी ढाका में हर साल कम से कम दो बार अत्यधिक गर्मी की लहर पड़ेगी — एक बार मानसून से पहले और एक मानसून के बाद
सर्दियों के मौसम की घंटियां बज गईं ख़तरे की
अध्ययन मानता है कि आने वाले दशकों में बांग्लादेश में सर्दियां लगभग गायब हो सकती हैं। उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में दिसंबर-जनवरी में ठंड सिर्फ एक या दो दिन, दक्षिणी जिलों में सर्दियों का मौसम पूरी तरह खत्म हो सकता है।
बारिश में 15% तक बढ़ोतरी
➡️ 2070 तक मानसून में 118 मिमी अतिरिक्त बारिश
➡️ 2100 तक बारिश में 255 मिमी यानी 15% की वृद्धि
इससे बाढ़, जलभराव और कृषि पर बड़ा असर पड़ेगा।
समुद्री जलस्तर बढ़ा तो संकट और गहराएगा
रिपोर्ट में अनुमान:
➡️ सालाना समुद्री जलस्तर वृद्धि: 3.8 से 5.8 मिमी
(जो वैश्विक औसत 2.1 मिमी से दोगुना है)
➡️ 2100 तक 12-18% तटीय भूमि स्थायी रूप से पानी में डूब सकती है
सुंदरवन का 23% हिस्सा नष्ट होने का खतरा
बढ़ते समुद्री जलस्तर और खारे पानी के फैलाव से सुंदरवन का 918 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, यानी 23% भाग खत्म होने का खतरा। यह परिजनों, वन्यजीवों और पर्यावरणीय संतुलन के लिए बड़ा खतरा है।
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