
नेपाल में ऐसा भूचाल आया है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। सोशल मीडिया बैन करने का फैसला केपी शर्मा ओली को इतना महंगा पड़ा कि उनकी पूरी सरकार ही चली गई। हालत ये है कि अब ओली छिपते फिर रहे हैं और नेपाल की सत्ता सेना के हाथों में आ चुकी है। सवाल यह है कि आखिर क्यों नेपाल की जनता, खासकर Gen-Z, इस कदर भड़क उठी कि सत्ता ही बदल गई? जवाब है—एक 11 साल की मासूम बच्ची का हादसा, जिसने नेपाल की राजनीति की नींव हिला दी।
अगस्त में पड़ी क्रांति की नींव
अगस्त की शुरुआत में नेपाल के ललितपुर जिले के हरिसिद्धि में एक बड़ा हादसा हुआ। एक प्रांतीय मंत्री की सरकारी कार ने पैदल क्रॉसिंग पर खड़ी 11 साल की बच्ची को टक्कर मार दी। बच्ची बुरी तरह घायल हो गई। गाड़ी रुकने के बजाय आगे बढ़ गई, लेकिन स्थानीय लोगों ने ड्राइवर को पकड़ लिया। यह महज हिट एंड रन केस नहीं था, बल्कि एक ऐसी चिंगारी बनी जिसने युवाओं के अंदर दबे गुस्से को भड़का दिया।
क्यों भड़का गुस्सा?
➡️ मंत्री के ड्राइवर को 24 घंटे के अंदर जमानत मिल गई।
➡️ पीएम केपी शर्मा ओली ने घटना को “मामूली हादसा” करार दिया।
➡️ बच्ची की घायल तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं।
लोगों ने लिखा—“बच्ची सड़क पर तड़पती रही और सरकारी काफिला बिना रुके निकल गया।”
इसके बाद #JusticeForTheGirl और #HatyaraSarkar जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
पहले से सुलग रहा था गुस्सा
नेपाल की Gen-Z यानी युवा पीढ़ी पहले से ही बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी से परेशान थी। हादसे ने उन्हें सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने का मौका दे दिया।
सोशल मीडिया बैन बना आखिरी वार
4 सितंबर को ओली सरकार ने फेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया।
यहीं से हालात बिगड़ गए।
➡️ 8 और 9 सितंबर को हजारों युवाओं ने संसद, राष्ट्रपति भवन और पीएम ऑफिस तक पर धावा बोल दिया।
➡️ सरकारी दफ्तरों में तोड़फोड़ हुई, गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया।
➡️ सेना ने मोर्चा संभाला और ओली को इस्तीफा देकर छिपना पड़ा।
ओली और उनके मंत्री कहां हैं?
ओली और उनके कई मंत्री फरार बताए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि वे अभी नेपाल में ही किसी अज्ञात जगह पर छिपे हुए हैं। फिलहाल, देश की कमान सेना ने संभाल ली है।
क्या सिर्फ सोशल मीडिया बैन वजह था?
अगर नेपाल के हालात देखें तो साफ है कि तख्तापलट की स्क्रिप्ट पहले ही लिखी जा चुकी थी। बेरोजगारी चरम पर थी। भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे थे। आम जनता को कोई जवाबदेही नहीं मिल रही थी। सोशल मीडिया बैन और बच्ची के हादसे ने जनता को वह चिंगारी दे दी, जिसने सत्ता की जड़ें हिला दीं।
अब आगे क्या?
नेपाल में अभी अंतरिम सरकार की कवायद चल रही है। सेना के पास फिलहाल कमान है, लेकिन स्थायी सरकार बनने में वक्त लगेगा। सवाल यह है कि क्या नेपाल में लोकतंत्र लौटेगा या सेना लंबे समय तक सत्ता में रहेगी?
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