
वॉशिंगटन से आई इस बड़ी खबर ने दुनियाभर की नज़रें भारत-अमेरिका रिश्तों पर फिर से गड़ा दी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ मेगा ट्रेड डील के ऐलान के बाद अब भारत को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका जल्द ही भारत के साथ एक 'बहुत बड़ी डील' करने जा रहा है। उन्होंने सीधे कहा – “हम भारत के लिए अपने दरवाजे खोलने जा रहे हैं।”
चीन के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के बाद, US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कहा, “हमने कल ही चीन के साथ ट्रेड डील पक्की की है। हमने कुछ बेहतरीन सौदे किए हैं। हम आने वाले दिनों में भारत के साथ बहुत बड़ा सौदा करने जा रहे हैं। हर कोई डील करना चाहता है, उसका हिस्सा बनना चाहता है।” व्हाइट हाउस के सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और चीन के बीच हुआ नया समझौता रेयर अर्थ मिनरल्स की शिपमेंट में तेजी लाने पर केंद्रित है, जो अमेरिका की टेक्नोलॉजी और रक्षा इंडस्ट्री के लिए अहम हैं।
भारत के लिए खुलेंगे दरवाजे, बाकी को मिलेगा "धन्यवाद"
ट्रंप ने यह भी कहा कि, “हम हर देश के साथ सौदे नहीं करने जा रहे हैं। कुछ देशों को हम पत्र भेजकर धन्यवाद कहेंगे और कहेंगे कि आपको 25, 35 या 45 फीसदी का भुगतान करना होगा। लेकिन हम भारत के लिए दरवाजे खोल रहे हैं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चीन के साथ भी दरवाजे खुल रहे हैं, लेकिन भारत को अमेरिका खास प्राथमिकता देने जा रहा है।
भारत-अमेरिका डील अब भी टैरिफ के जाल में उलझी
हालांकि, सब कुछ इतना आसान नहीं है। कुछ दिन पहले तक यह जानकारी आई थी कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अटक गई है। अमेरिका चाहता है कि भारत मक्का और सोयाबीन जैसे कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करे, लेकिन भारत इसे खाद्य सुरक्षा और किसानों की हितों के खिलाफ मानता है। अगर 9 जुलाई तक कोई अंतरिम समझौता नहीं होता, तो भारत के कई उद्योगों को अमेरिका में 26% तक टैक्स देना पड़ सकता है।
भारत की स्थिति – “जीरो टैरिफ हो या डील नहीं”
भारत सरकार का कहना है कि अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 10% बेसलाइन टैरिफ गलत है। भारत चाहता है कि टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो पार्ट्स जैसे उत्पादों पर कोई टैक्स न लगे। दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारी चाहते हैं कि भारत झुके और अमेरिका को ज़्यादा समय दिया जाए। भारतीय अधिकारियों ने कहा – “हम फिक्स टर्म डील चाहते हैं, जिसमें भविष्य में कोई नया टैक्स न लगाया जाए।”
इस डील से किसे होगा फायदा?
➡️ भारत को मिलेगा अमेरिकी मार्केट में बेहतर एक्सेस
➡️ अमेरिका को मिलेगा कृषि उत्पादों का बड़ा बाजार
➡️ दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गहराएंगे रिश्ते
➡️ चीन को रणनीतिक तौर पर झटका
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