
मॉस्को। भारत और रूस की दोस्ती एक बार फिर सुर्खियों में है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर मंगलवार को राजधानी मॉस्को पहुंच गए। यह दौरा रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के निमंत्रण पर हो रहा है। जयशंकर का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और भारत के बीच ‘टैरिफ वॉर’ का असर दिख रहा है और भारत-रूस की नजदीकियां और मजबूत होती जा रही हैं।
क्या है जयशंकर के रूस दौरे का एजेंडा?
जयशंकर आज, 20 अगस्त (बुधवार) को भारत-रूस अंतर-सरकारी व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग आयोग (IRIGC-TEC) के 26वें सत्र की सह-अध्यक्षता करेंगे। वह भारत-रूस व्यापार मंच की बैठक को संबोधित करेंगे। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ मुलाकात में द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा और क्षेत्रीय-वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान भारत-रूस की विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर रहेगा।
भारत-रूस रिश्तों में नई गर्माहट
हाल ही में एनएसए अजीत डोभाल रूस दौरे पर गए थे और उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। उसी दौरान पुतिन के भारत आने पर सहमति बनी थी। इस महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन दो बार फोन पर बातचीत कर चुके हैं।
जयशंकर का यह दौरा भी दोनों देशों की नजदीकी बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जयशंकर की पुतिन से भी मुलाकात हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अमेरिका-रूस समीकरण के बीच भारत की भूमिका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर के बीच भारत ने रूस के साथ अपने रिश्तों को और गहरा किया है। पुतिन ने ट्रंप से मुलाकात के बाद पीएम मोदी को फोन कर स्थिति की जानकारी दी थी। यह साफ इशारा है कि रूस-भारत संबंध अब सिर्फ रणनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक समीकरणों को संतुलित करने की भूमिका भी निभा रहे हैं।
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