
बांग्लादेश की सियासत में भूचाल ला देने वाला फैसला—पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (ICT) ने मानवता के विरुद्ध अपराधों में मौत की सजा सुनाई है। 458 पन्नों के फैसले में कोर्ट ने साफ कहा कि जुलाई 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के दौरान निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलवाने की मुख्य जिम्मेदारी हसीना की थी। उनकी अनुपस्थिति में ट्रायल चला—क्योंकि हसीना अगस्त 2024 से भारत में निर्वासन में हैं। इस ऐतिहासिक फैसले ने न सिर्फ बांग्लादेश, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है।
कोर्ट का दावा: हसीना का ऑडियो ही बना असली सबूत
महीनों चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई चौंकाने वाले सबूत पेश किए—
वायरल ऑडियो
चश्मदीद गवाह
मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट
फैसला सुनाते समय कोर्ट ने वह ऑडियो जारी किया, जिसमें हसीना कथित तौर पर पुलिस प्रमुख से कह रही हैं— “लोगों पर गोलियां चलाओ।” यह ऑडियो फैसले के बाद प्रथम आलोचक जैसे मीडिया पर लाइव दिखाया गया। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक 15 जुलाई–15 अगस्त 2024 के बीच 1400 से ज्यादा लोग मारे गए, जिसे ICT ने “सिस्टेमैटिक हिंसा” करार दिया।
विद्रोह की शुरुआत: जनवरी चुनाव से भड़का था आग का दरिया
जुलाई विद्रोह का बैकग्राउंड भी कोर्ट ने फैसले में दर्ज किया।
जनवरी 2024 के चुनाव में विपक्ष को कुचल दिए जाने के आरोप
छात्र संगठनों की सड़क पर उतरने की चेतावनी
सरकार द्वारा विपक्षी आवाजों को दबाना
पुलिस का “लाइव फायरिंग” आदेश
हसीना ने हमेशा इन प्रदर्शनों को “आतंकवाद” बताया था,
लेकिन कोर्ट ने कहा, “विद्रोह की मास्टरमाइंड खुद हसीना थीं।” उनके साथ दो बड़े नाम भी आरोपी बनाए गए: पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून। चौंकाने वाली बात यह है की, अल-मामून ने कोर्ट में हसीना के खिलाफ गवाही दी, जिससे ट्रायल और तेज हो गया।
अभियोजन ने लगाए ये 5 बड़े आरोप
ICT अभियोजन पक्ष ने हसीना पर गंभीर आरोप लगाए—
हत्याएं (Murders)
जबरन गायब करना (Forced Disappearances)
यातनाएं (Torture)
मानवता के खिलाफ हिंसा
राज्य शक्ति का दुरुपयोग
हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने चेतावनी दी, “अवामी लीग पर बैन हटाओ, नहीं तो फरवरी चुनाव में हिंसा हो सकती है।” कोर्ट के बाहर पीड़ित परिवारों के नारे गूंजे, “फांसी दो, न्याय दो!” मीर मुग्धो के भाई ने कहा, “लोगों ने अगस्त 2024 में ही फैसला सुना दिया था।”
यूनुस सरकार की मांग: भारत हसीना को सौंपे
अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने फैसले को ऐतिहासिक बताया। मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम बोले, “हसीना विद्रोह की मुख्य सूत्रधार थीं।” सरकार ने भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की औपचारिक अपील भेजी है, लेकिन अभी तक दिल्ली ने कोई जवाब नहीं दिया। ढाका में Shoot-at-Sight आदेश जारी है। बीएनपी नेता ने कहा, “हमें भारत की जरूरत है, नहीं तो हालात बिगड़ सकते हैं।”
अवामी लीग और हसीना समर्थकों ने ICT पर राजनीतिक साज़िश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “यह एक कंगारू कोर्ट है। यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है।” लेकिन पीड़ित परिवारों और मानवाधिकार संगठनों ने इसे न्याय का पहला कदम कहा है। ICT, जो 1971 युद्ध अपराधों के लिए बना था, अब हसीना सरकार के शासनकाल के अपराधों की भी जांच कर रहा है।
अब तक—
203 आरोपी बनाए गए
73 हिरासत में हैं
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