
जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को रूस के साथ रिश्तों को लेकर धमकी दी, तो शायद उन्होंने ये नहीं सोचा था कि इस बार भारत चुप नहीं बैठेगा। सोमवार को ट्रम्प के टैरिफ बढ़ाने वाले बयान के चंद घंटों बाद ही भारत सरकार ने न सिर्फ अमेरिका का नाम लेकर पलटवार किया, बल्कि आंकड़ों और तथ्यों से ट्रम्प की दोहरी नीति की पोल खोल दी। विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की कीमत पर किसी के दबाव में नहीं आने वाला।
भारत को निशाना बनाना गलत है : रणधीर जायसवाल
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दो टूक कहा, “भारत को निशाना बनाना गलत है। हम अपने राष्ट्रीय हितों के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।”
भारत ने अमेरिका और यूरोपीय यूनियन को लेकर सीधे तथ्यों के साथ जवाब दिया:
➡️ अमेरिका आज भी अपने परमाणु उद्योग के लिए रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड खरीद रहा है।
➡️ ईवी इंडस्ट्री के लिए पैलेडियम, उर्वरक और रसायन भी रूस से मंगवा रहा है।
➡️ EU ने 2024 में रूस के साथ 67.5 बिलियन यूरो का व्यापार किया — भारत से कई गुना ज्यादा!
➡️ यूरोप तेल के साथ-साथ खनिज, इस्पात, मशीनरी, और फर्टिलाइजर भी रूस से आयात करता रहा है।
अब किसी का दबदबा नहीं चलेगा : एस. जयशंकर
एक कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी ट्रम्प पर बिना नाम लिए जवाब दिया, "हम ऐसे समय में जी रहे हैं जो काफी उलझा हुआ और अनिश्चित है। हम सभी चाहते हैं कि दुनिया की व्यवस्था ऐसी हो जो सबके लिए बराबर और प्रतिनिधित्व वाली हो, न कि कुछ ही देशों का दबदबा हो।"
भारत का रुख: किफायती ऊर्जा, आत्मनिर्भर नीति और सशक्त विदेश नीति
➡️ यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका ने ही भारत को रूस से सस्ता तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया था।
➡️ भारत के लिए प्राथमिकता है – किफायती ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा।
➡️ आलोचना करने वाले देश खुद भी रूस से व्यापार कर रहे हैं, यह दोहरे मापदंड हैं।
क्या है ट्रम्प की धमकी?
डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को सोशल मीडिया पर लिखा, "भारत को कोई फर्क नहीं पड़ता कि रूस के हमले में कितने लोग मारे जा रहे हैं। इसलिए, मैं भारत पर टैरिफ को बढ़ाने जा रहा हूं।"
भारत सरकार के इस जवाब से साफ है कि अब वैश्विक मंच पर भारत आंकड़ों और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने को तैयार है।
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