
ये खबर ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था के लिए किसी भूकंप से कम नहीं। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्टील कंपनी के मालिक और भारतीय मूल के अरबपति लक्ष्मी मित्तल ब्रिटेन छोड़ रहे हैं। वजह—लेबर सरकार के नए टैक्स सुधार, जो अरबपतियों पर पहले से ज्यादा भारी पड़ने वाले हैं। नाराज होकर मित्तल ने अपना ठिकाना बदलने का फैसला ले लिया है और अब वे दुबई व स्विट्जरलैंड में शिफ्ट होंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने दुबई के पास एक प्राइवेट आइलैंड पर बेहद लग्जरी प्रॉपर्टी खरीद ली है।
लेबर सरकार की टैक्स पॉलिसी बनी वजह
आर्सेलर मित्तल (ArcelorMittal) के मालिक लक्ष्मी मित्तल ब्रिटेन के सबसे बड़े अरबपतियों में शुमार हैं। लेकिन यूके सरकार के टैक्स सुधार उनसे रास नहीं आए।
सरकार जिन बड़े बदलावों की तैयारी में है:
➡️ 20% तक एक्जिट टैक्स
➡️ मैंशन टैक्स
➡️ 40% अधिक इनहेरिटेंस (विरासत) टैक्स
मित्तल जैसे कई अरबपति इसे “ओवर टैक्सिंग मॉडल” मानते हैं। ब्रिटेन सरकार के आर्थिक विशेषज्ञ भी मान चुके हैं कि अरबपतियों का देश छोड़ना अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है।
दुबई बनेगा नया ठिकाना — क्यों है पहली पसंद?
दुबई टैक्सेशन के मामले में दुनिया के सबसे फ्रेंडली देशों में शामिल है।
यही वजह है कि मित्तल ने यहां अपना घर बसाने का फैसला किया।
दुबई में
✔ कोई इनहेरिटेंस टैक्स नहीं
✔ निवेश पर बड़े टैक्स लाभ
✔ गोल्डन वीजा का फायदा
रिपोर्ट्स बताती हैं कि मित्तल ने दुबई के पास बने NAIA Island पर नई प्रॉपर्टी खरीदी है।
क्यों खास है NAIA Island?
नाइया आइलैंड अरबपतियों के लिए डिजाइन किया गया अल्ट्रा-लग्जरी हब है—
हॉस्पिटैलिटी का नया स्तर
यहां पहला Cheval Blanc Mansion बनने जा रहा है — 7-स्टार होटल जैसी सर्विस के साथ।
हर घर के लिए प्राइवेट बीच
निवासियों को सीधा अरेबियन गल्फ तक पहुंच — पूरी प्राइवेसी।
लो-राइज आर्किटेक्चर
उंची इमारतें नहीं — हर घर से समंदर का नज़ारा।
यॉट और मैरीटाइम लग्जरी
जब चाहें समुद्री यात्रा — प्राइवेट यॉट बर्थिंग सुविधा।
इस पूरे प्रोजेक्ट के 2029 तक पूरी तरह तैयार होने की संभावना है।
कितनी है कीमत?
अनुमान के अनुसार मित्तल का नया आशियाना 21,000 से 48,000 स्क्वेयर फीट के बीच होगा।
मित्तल की नेटवर्थ
लक्ष्मी निवास मित्तल, राजस्थान के मूल निवासी —
➡️ आर्सेलर मित्तल के मालिक
➡️ 1980-90 के दशक में बड़े अधिग्रहणों से विस्तार
➡️ नेटवर्थ — £15.4 अरब (लगभग ₹1.6 लाख करोड़)
उनका यूके छोड़ना ब्रिटिश अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
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