
चीन के तियानजिन में चल रहे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में इस बार भारत की भूमिका और भी अहम दिखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को तियानजिन पहुंचे और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें साझा हितों और चुनौतियों पर चर्चा की गई।
अब सोमवार को समिट का सबसे अहम सत्र हुआ। इसमें सभी सदस्य देशों के नेताओं ने शांति, स्थिरता और विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। समिट के अंत में साझा घोषणापत्र जारी हुआ, जिस पर पूरी दुनिया की नजर थी। इसमें साफ किया गया कि SCO देश आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ेंगे।
मोदी-पुतिन की खास मुलाकात
सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तियानजिन के होटल रिट्ज कार्लटन पहुंचे। यहां दोनों नेताओं की द्विपक्षीय बैठक का आयोजन हुआ। बैठक कक्ष विशेष रूप से मोदी और पुतिन के लिए तैयार किया गया था।
आतंकवाद पर SCO का कड़ा रुख
समिट में सदस्य देशों ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ कोई दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने संकल्प लिया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के तहत सभी आतंकी संगठनों के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ी जाएगी।
घोषणा पत्र में कहा गया: “आतंकवादी, अलगाववादी और उग्रवादी समूहों का स्वार्थ के लिए इस्तेमाल अस्वीकार्य है और इनसे निपटने में संप्रभु राज्यों और उनकी संस्थाओं की भूमिका सबसे अहम है।”
आतंकी हमलों की निंदा
सदस्य देशों ने हालिया आतंकी घटनाओं की कड़ी निंदा की।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हमला
11 मार्च 2025 को जाफ़र एक्सप्रेस पर हमला
21 मई 2025 को खुजदार में हमला
इन हमलों को मानवता पर हमला बताते हुए एकजुट होकर आतंकवाद का मुकाबला करने का संकल्प लिया गया।
भारत की थीम पर जोर
घोषणापत्र में भारत की थीम “एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य” का जिक्र किया गया, जिसे सदस्य देशों ने सराहा।
इनोवेशन और स्टार्टअप पर सहयोग
सदस्य देशों ने 3-5 अप्रैल 2025 को नई दिल्ली में आयोजित 5वें एससीओ स्टार्टअप फोरम का स्वागत किया। इस फोरम ने विज्ञान, तकनीकी उपलब्धियों और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा दी।
इसके साथ ही 21-22 मई 2025 को नई दिल्ली में आयोजित 20वें एससीओ थिंक टैंक फोरम का भी जिक्र हुआ। इसमें भारतीय विश्व मामलों की परिषद (ICWA) और उसके SCO अध्ययन केंद्र की भूमिका की सराहना की गई, जिसने सांस्कृतिक और मानवीय आदान-प्रदान को मजबूत किया।
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