
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद लिए गए फैसले अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। “अमेरिकन फर्स्ट” की नीति और दुनियाभर के देशों पर टैरिफ थोपने की रणनीति ने अमेरिका को ही मंदी की चपेट में ला खड़ा किया है। यह बड़ा दावा किसी और ने नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने किया है।
न्यूज़वीक को दिए एक इंटरव्यू में मूडीज के चीफ इकोनॉमिस्ट मार्क जैंडी ने कहा, “अमेरिकी इकोनॉमी की खस्ताहाल स्थिति को लेकर जो आशंकाएं कई महीने पहले जताई गई थीं, अब वे सच होती नजर आ रही हैं। मुझे नहीं लगता कि इस समय अमेरिका मंदी में है, लेकिन यह बिल्कुल मंदी के कगार पर खड़ा है। 2025 के आखिर तक अमेरिका गहरी मंदी की चपेट में आ सकता है।”
ट्रंप प्रशासन के ‘खोखले’ दावे
मूडीज के अनुसार, ट्रंप प्रशासन की नीतियां व्यापार और रोजगार दोनों मोर्चों पर उल्टा असर डाल रही हैं।
➡️ दुनियाभर से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ थोपने से वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ।
➡️ अमेरिकी उद्योगों की लागत बढ़ी और निवेश का माहौल कमजोर हुआ।
➡️ रोजगार बाजार में भी दबाव साफ दिखाई देने लगा है।
मार्क जैंडी का रिकॉर्ड क्यों अहम?
➡️ मार्क जैंडी वही अर्थशास्त्री हैं जिन्होंने 2008 के वित्तीय संकट का सटीक अनुमान लगाया था।
➡️ बीते महीनों से वे लगातार ट्रंप की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं।
➡️ उनका मानना है कि मौजूदा हालात को न सुधारा गया तो अमेरिका के लिए आर्थिक संकट और गहराएगा।
असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं
अमेरिका मंदी की चपेट में आया तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। एशियाई बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है। यूरोप की इकोनॉमी पर भी असर देखने को मिलेगा। वैश्विक निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

