
ओस्लो से आई खबर ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया है। नॉर्वे की नोबेल समिति ने 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की लोकतंत्र सेनानी मारिया कोरिना मचाडो को दिया है। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है, जिन्होंने हाल ही में खुद को इस पुरस्कार का ‘सबसे हकदार’ बताया था।
“यह सम्मान हमारे लोगों की जीत” – मचाडो
58 वर्षीय मचाडो ने पुरस्कार मिलने पर कहा,
“यह सम्मान हमारे लोगों की जीत है। हम लोकतंत्र और शांति के लिए लड़ते रहेंगे।” नोबेल समिति के चेयर जॉर्गन वाट्ने फ्राइडनेस ने भी कहा, “मचाडो ने विरोध को एकजुट किया, समाज के सैन्यीकरण का विरोध किया और शांतिपूर्ण लोकतंत्र की स्थापना में अडिग रहीं।” मचाडो वेनेजुएला की विपक्षी नेता हैं, जिन्होंने तानाशाही शासन के खिलाफ शांति और साहस से लड़ाई लड़ी।
ट्रंप की ‘नोबेल महत्वाकांक्षा’ को झटका
ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि उन्होंने “सात युद्ध रोके” और इजरायल-हमास संघर्ष को समाप्त किया, इसीलिए वे पुरस्कार के “सबसे योग्य उम्मीदवार” हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी उनका नाम प्रस्तावित किया था। लेकिन समिति ने मचाडो को प्राथमिकता दी, जिन्होंने 2024 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की कोशिश की थी, पर अदालत ने रोक लगा दी थी।
व्हाइट हाउस का तीखा हमला – “यह राजनीति है, शांति नहीं”
नोबेल के फैसले के बाद व्हाइट हाउस भड़क उठा। प्रवक्ता स्टीवन चेउंग ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “नोबेल समिति ने फिर साबित किया कि वे राजनीति को शांति से ऊपर रखते हैं। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप युद्ध खत्म करेंगे, जानें बचाएंगे और दुनिया को शांति देंगे।” ट्रंप समर्थकों ने इसे “नोबेल की साजिश” बताया, जबकि आलोचक इसे “ट्रंप की अहंकारी उम्मीदों का अंत” कह रहे हैं।
सोशल मीडिया पर ट्रेंड – #NobelPeacePrize2025
सोशल मीडिया पर #NobelPeacePrize2025 ट्रेंड कर रहा है। MAGA समर्थकों ने मचाडो को “अज्ञात व्यक्ति” बताया, वहीं वेनेजुएला के विपक्षी दल इसे “लोकतंत्र की जीत” कह रहे हैं।
ट्रंप ने X पर लिखा – “मैंने सात युद्ध रोके, लेकिन ये लोग राजनीति खेलते हैं!”
लैटिन अमेरिका में लोकतंत्र की जीत का प्रतीक
मचाडो का यह सम्मान केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि लैटिन अमेरिका में लोकतंत्र की नई उम्मीद बन गया है। उनकी संघर्ष गाथा ने 80 लाख वेनेजुएलाई शरणार्थियों की पीड़ा को वैश्विक मंच पर पहुंचा दिया है। यह पुरस्कार तानाशाही से शांतिपूर्ण संक्रमण और ‘सिविलियन करेज’ की मिसाल पेश करता है।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

