
पेरिस। फ्रांस की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल में है। प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरू (Francois Bayrou) को संसद में विश्वास मत (Confidence Vote) हासिल नहीं हो पाया और उनकी सरकार गिर गई। बायरू ने सोमवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) को इस्तीफा सौंपने की घोषणा की है।
विश्वास मत में करारी हार
संसद में हुए मतदान में बायरू सरकार के पक्ष में सिर्फ 194 वोट पड़े, जबकि 364 सांसदों ने उनके खिलाफ वोट दिया। इस तरह भारी बहुमत से बायरू की सरकार गिर गई।
क्यों मांगा था विश्वास मत?
दिलचस्प बात यह है कि विश्वास मत लाने की पहल खुद बायरू ने ही की थी। कारण था देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था और तेजी से बढ़ता कर्ज। बायरू ने सांसदों से अपील की थी कि वे उनके प्रस्तावित सार्वजनिक खर्च में कटौती की योजना को समर्थन दें। उनका तर्क था कि फ्रांस का बजट घाटा यूरोपीय संघ (EU) की तय सीमा 3% से लगभग दोगुना हो चुका है। देश का कर्ज अब GDP के 114% तक पहुंच गया है।
सिर्फ 9 महीने टिक पाए प्रधानमंत्री
बायरू ने यह पद संभाले हुए सिर्फ 9 महीने ही हुए थे। विश्वास मत में नाकामी के बाद अब वे राष्ट्रपति मैक्रों को इस्तीफा देंगे।
राष्ट्रपति मैक्रों के लिए संकट
बायरू सरकार गिरने से सबसे बड़ी चुनौती अब राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के सामने है। उन्हें नया प्रधानमंत्री चुनना होगा। साथ ही संसद में समर्थन जुटाना भी आसान नहीं होगा। विपक्ष पहले से ही मैक्रों की आर्थिक नीतियों को असफल करार देता आ रहा है।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

