
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहे सीमा विवाद ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। हाल ही में पाकिस्तान की ओर से की गई एयरस्ट्राइक में निर्दोष नागरिकों की मौत के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। दोनों देशों के बीच दोहा में हुई वार्ता में युद्धविराम (Ceasefire) पर सहमति तो बन गई, लेकिन पाकिस्तान के नए बयान इस समझौते के भविष्य पर साया डाल रहे हैं।
“सीजफायर तभी टिकेगा जब अफगानिस्तान अपनी ज़मीन से हमले रोकेगा”
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने दोहा वार्ता के बाद कहा, “हमारे और अफगानिस्तान के बीच यह नाज़ुक संघर्षविराम केवल इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या अफगानिस्तान अपनी ज़मीन से होने वाले हमलों को रोक पाता है या नहीं।” आसिफ ने यह बयान रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में दिया और साफ कहा कि पाकिस्तान किसी भी नए हमले को “समझौते का उल्लंघन” मानेगा।
तालिबान से मुंह की खाई, अब दे रहा धमकी
कतर और तुर्की की मध्यस्थता से हुए इस समझौते से ठीक पहले दोनों देशों के बीच एक हफ्ते तक भारी झड़पें हुईं। पाकिस्तान का दावा है कि उस पर हमले करने वाले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकी समूह अफगानिस्तान में पनाह लिए हुए हैं।
आसिफ ने कहा — “अगर अफगानिस्तान से एक भी हमला हुआ, तो हम इसे सीजफायर का उल्लंघन मानेंगे। समझौते की लिखित शर्तों में कोई बदलाव नहीं होगा।”
अफगानिस्तान ने पलटवार किया — “पाकिस्तान फैला रहा झूठ”
पाकिस्तान के आरोपों के बाद अफगानिस्तान ने भी करारा जवाब दिया। तालिबान प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने कहा — “दोनों देशों ने तय किया है कि वे एक-दूसरे के खिलाफ शत्रुता नहीं दिखाएंगे और किसी ऐसे समूह का समर्थन नहीं करेंगे जो पड़ोसी पर हमला करता हो।”
मुजाहिद ने पाकिस्तान पर गलत सूचनाएं फैलाने और ISIL लड़ाकों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
9 अक्टूबर को काबुल पर हवाई हमला
ख्वाजा आसिफ ने खुलासा किया कि पाकिस्तान ने आत्मरक्षा में एयरस्ट्राइक की थी। उन्होंने कहा, “9 अक्टूबर को काबुल पर हवाई हमला कर पाकिस्तान तालिबान के नेता नूर वली महसूद को निशाना बनाया गया।” हालांकि, अफगानिस्तान का कहना है कि इस हमले में निर्दोष नागरिक मारे गए।
अगली वार्ता इस्तांबुल में
आसिफ ने बताया कि अगली बैठक 25 अक्टूबर को इस्तांबुल में होगी। इसमें यह तय किया जाएगा कि युद्धविराम को लागू करने का तंत्र (implementation mechanism) कैसे बनाया जाए।
हालात अब भी तनावपूर्ण
हालांकि दोहा में हुई सहमति ने अस्थायी राहत दी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों पक्षों ने संयम नहीं बरता, तो यह संघर्ष दोबारा भड़क सकता है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमावर्ती इलाकों में सैन्य गतिविधियां अभी भी जारी हैं, जिससे हालात “नाज़ुक” बने हुए हैं।
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