
शनिवार, 19 अप्रैल दोपहर 12:17 बजे अचानक धरती कांप उठी। अफगानिस्तान में आए 5.8 तीव्रता के भूकंप ने पड़ोसी देशों में भी दहशत फैला दी। जम्मू-कश्मीर और दिल्ली-NCR में कंपन महसूस होते ही लोग घरों और दफ्तरों से भागकर खुले में आ गए। पाकिस्तान में भी इस भूकंप का असर देखने को मिला।
कश्मीर के श्रीनगर में एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया, "मैं दफ्तर में था, तभी कुर्सी हिलने लगी। घबराकर मैं बाहर भागा। सभी लोग मैदान में इकट्ठा हो गए।"
धरती क्यों कांपती है? जानें वजह
भूकंप का सीधा कनेक्शन धरती की टेक्टोनिक प्लेट्स से होता है। धरती की सतह 7 बड़ी और कई छोटी प्लेट्स से बनी है, जो लगातार तैरती रहती हैं। जब ये प्लेट्स टकराती या खिसकती हैं, तो उनके कोनों में दबाव बनता है। अत्यधिक दबाव के बाद प्लेट्स टूटती हैं और नीचे की ऊर्जा बाहर निकलती है, जिससे धरती हिलती है और भूकंप आता है।
हाल में आए भूकंप: म्यांमार से अमेरिका तक
दुनियाभर में बीते दिनों भूकंप की घटनाएं तेज़ी से बढ़ी हैं।
28 मार्च को म्यांमार और थाईलैंड में 7.2 तीव्रता का भूकंप आया, जिसमें 1600 से ज्यादा मौतें और 3400 से अधिक लोग घायल हुए।
14 अप्रैल को अमेरिका के कैलिफोर्निया में 5.2 तीव्रता का झटका महसूस किया गया।
25 मार्च को न्यूजीलैंड में 6.5 तीव्रता का भूकंप आया।
25 फरवरी को कोलकाता में भी 5.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया।
भूकंप के वक्त क्या करें, क्या न करें?
झटके महसूस होते ही घबराएं नहीं, बल्कि इन बातों का पालन करें:
घर के अंदर हैं तो मजबूत टेबल या बेड के नीचे छिपें, सिर और गर्दन को हाथों से ढकें।
खिड़कियों, शीशों और भारी चीज़ों से दूर रहें।
बाहर हैं तो खुले मैदान में जाएं, इमारतों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें।
वाहन में हों तो गाड़ी रोककर खुले स्थान पर खड़े हो जाएं।
गैस लीकेज, बिजली के तारों और क्षतिग्रस्त इमारतों से बचें।
अफवाहों पर ध्यान न दें, और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
सतर्क रहें, सुरक्षित रहें
भूकंप कब, कहां और कितनी तीव्रता से आएगा — इसका सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता। लेकिन सजगता और सही जानकारी से जान-माल का नुकसान कम किया जा सकता है। ऐसे हालात में अपनी सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
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