
चीन की दबंगई से दुनिया भर में खलबली मची हुई है और अब ताइवान ने ऐसा दांव चला है, जिसने बीजिंग की नींद उड़ा दी है। इस साल की शुरुआत में चीन ने परमानेंट मैग्नेट या रेयर अर्थ मैग्नेट की सप्लाई चेन को तोड़कर पूरी दुनिया को झटका दिया। ये वही मैग्नेट हैं जिनके बिना स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक कार तक अधूरी हैं। अब चीन के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी ताइवान ने भारत को खुला ऑफर दिया है—“आप हमें दुर्लभ खनिज (Rare Earth) दें, बदले में हम आपको अपनी सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी देंगे।”
चीन की बादशाहत को सीधी चुनौती
रेयर अर्थ मिनरल्स में चीन का लगभग एकाधिकार है। दुनिया का सबसे बड़ा भंडार उसके पास है और उत्पादन की तकनीक भी उसी के पास। यही वजह है कि परमानेंट मैग्नेट बनाने के बाजार में वह सिरमौर बना हुआ है। पर अब ताइवान का यह कदम चीन की इस बादशाहत को सीधी चुनौती देता है।
ताइवान के TAITRA (ताइवान एक्सटर्नल ट्रेड डेवलपमेंट काउंसिल) के डिप्टी डायरेक्टर केवन चेंग ने नई दिल्ली में हुए Taiwan Expo 2025 के दौरान न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, “हमारे पास उत्पाद बनाने की बेहतरीन टेक्नोलॉजी है, लेकिन हमें भारत से मिनरल्स चाहिए ताकि हम साथ में काम कर सकें।” चेंग का यह बयान चीन के लिए सीधे तौर पर करारा जवाब माना जा रहा है।
भारत का तीसरा सबसे बड़ा खजाना
भारत के पास लगभग 6.9 मिलियन मीट्रिक टन रेयर अर्थ मिनरल्स का खजाना है, जो दुनिया में तीसरे नंबर पर है। भारत से आगे सिर्फ चीन और ब्राजील हैं। इंडिया ब्रैंड इक्विटी फाउंडेशन के आंकड़े बताते हैं कि इसके बाद ऑस्ट्रेलिया, रूस, वियतनाम, अमेरिका और ग्रीनलैंड का स्थान आता है। फिर भी, इतनी बड़ी संपदा के बावजूद भारत अभी तक इन मिनरल्स से परमानेंट मैग्नेट बनाने की तकनीक में शुरुआती दौर में ही है।
सरकार की तैयारी और क्रिटिकल मिनरल्स मिशन
भारत सरकार ने क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए खनन मंत्रालय के जरिए कई मोर्चों पर काम तेज किया है।
➡️ मिनरल्स सिक्योरिटी पार्टनरशिप
➡️ इंडो पेसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क
➡️ इनिशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज
इन अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के साथ तालमेल बैठाकर भारत अपने खनिजों की वैश्विक वैल्यू चेन तैयार कर रहा है। साथ ही, घरेलू कंपनियों को इंसेंटिव देकर यहां ही परमानेंट मैग्नेट बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
सेमीकंडक्टर: हर टेक्नोलॉजी की रीढ़
सेमीकंडक्टर के बिना आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया अधूरी है।
स्मार्टफोन
कंप्यूटर
एलईडी लाइट्स
सोलर पैनल
इलेक्ट्रिक कारें
रक्षा निर्माण
सब कुछ इसी पर टिका है। ताइवान दुनिया का लगभग 60% सेमीकंडक्टर बनाता है। अमेरिका के साथ टैरिफ विवादों के चलते अब वह भारत को एक बड़ा, सुरक्षित और टैलेंटेड बाजार मान रहा है।
भारत में निवेश की बौछार
ताइवान केवल खनिजों तक सीमित नहीं रहना चाहता। वह भारत में बड़े पैमाने पर चिप मैन्युफैक्चरिंग में निवेश के लिए तैयार है। ताइवानी Powerchip Semiconductor Manufacturing Corporation टाटा ग्रुप के साथ मिलकर अगले साल से बड़े पैमाने पर चिप उत्पादन की तैयारी कर रही है।
जियोपॉलिटिक्स में नया समीकरण
भारत और ताइवान की बढ़ती नजदीकी सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि भू-राजनीति को भी नया मोड़ दे सकती है। दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह साझेदारी गेम चेंजर साबित हो सकती है। अमेरिका भी इस रणनीति पर करीबी नजर रख रहा है।
दोनों देशों को होगा फायदा
भारत के लिए यह समझौता आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है—
स्वच्छ ऊर्जा मिशन को बल
रक्षा क्षेत्र में मजबूती
आर्थिक विकास को नई रफ्तार
वहीं ताइवान के लिए यह सौदा उसकी सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने और नया विशाल बाजार पाने का सुनहरा मौका है।
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