
ईरान में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं और अब अमेरिका ने भी कमर कस ली है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके अधिकारियों ने ऐसे सैन्य और खुफिया विकल्पों की जानकारी दी है, जिनके जरिए ईरान पर सिर्फ पारंपरिक हवाई हमले ही नहीं बल्कि उससे कहीं आगे जाकर दबाव बनाया जा सकता है। व्हाइट हाउस के गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि अमेरिका अब ईरान के खिलाफ “फुल स्पेक्ट्रम एक्शन” यानी सैन्य, साइबर और मनोवैज्ञानिक अभियानों को मिलाकर बड़ा कदम उठा सकता है।
ट्रंप के सामने रखे गए ‘एकीकृत युद्ध’ के विकल्प
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मामले में सीधे तौर पर बोलने से बचते हुए अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के सामने जो विकल्प पेश किए गए हैं, उनमें पारंपरिक एयर स्ट्राइक से कहीं ज्यादा व्यापक रणनीति शामिल है।
इन विकल्पों में—
सैन्य कार्रवाई: चुनिंदा ठिकानों पर सटीक हमले।
साइबर अटैक: ईरान के सरकारी नेटवर्क, सुरक्षा सिस्टम और डिजिटल कम्युनिकेशन को बाधित करना।
मनोवैज्ञानिक अभियान: शासन के खिलाफ माहौल बनाना, जनता और सुरक्षाबलों के मनोबल को तोड़ने की रणनीति।
सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम मंगलवार को व्हाइट हाउस में ईरान को लेकर अपडेटेड नीति और इन विकल्पों की समीक्षा करेगी। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इस बैठक में खुद राष्ट्रपति शामिल होंगे या नहीं।
ईरान में महंगाई और बेरोजगारी से फूटा जनता का गुस्सा
ईरान में इस वक्त हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। बढ़ती महंगाई, आर्थिक बदहाली और शासन से नाराजगी ने पूरे देश को सड़कों पर ला दिया है। 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए ये प्रदर्शन अब तीसरे हफ्ते में पहुंच चुके हैं। शुरुआत में लोग सिर्फ आर्थिक परेशानियों के खिलाफ उतरे थे, लेकिन धीरे-धीरे आंदोलन राजनीतिक रंग ले बैठा और अब “रेजीम चेंज” यानी शासन परिवर्तन की मांग खुलकर होने लगी है।
स्थिति की गंभीरता इसी से समझी जा सकती है कि ईरान सरकार ने इंटरनेट और संचार सेवाओं पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं, ताकि प्रदर्शनकारियों की आवाज दुनिया तक न पहुंच सके।
ट्रंप की ‘रेड लाइन’ चेतावनी, बोले – अब सब पर है नजर
इन सबके बीच राष्ट्रपति ट्रंप लगातार ईरान को चेतावनी दे रहे हैं। रविवार को उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी प्रशासन द्वारा तय की गई “रेड लाइन” को पार करता दिख रहा है।
ट्रंप ने साफ कहा कि अगर ईरानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई तेज की और हत्याएं नहीं रुकीं, तो अमेरिका कड़ा एक्शन लेने से पीछे नहीं हटेगा।
उनका कहना था कि ईरान में हो रही हर गतिविधि पर अमेरिकी प्रशासन की पैनी नजर है और जरूरत पड़ी तो तुरंत हस्तक्षेप किया जाएगा।
31 प्रांतों में आग, सैकड़ों मौतें और हजारों गिरफ्तारियां
खबरों के मुताबिक, प्रदर्शन अब ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। अमेरिका-आधारित मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि अब तक 500 से 544 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जबकि 10 हजारों से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि ईरान सरकार इन आंकड़ों को खारिज करती रही है, लेकिन इंटरनेट बंद होने और मीडिया पर पाबंदियों के चलते सही तस्वीर सामने आना मुश्किल हो गया है।
अब क्या ईरान पर बरसेगा अमेरिका का ‘डिजिटल और सैन्य तूफान’?
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर अमेरिका वाकई इन योजनाओं को अमल में लाता है, तो यह सिर्फ मिसाइल या बमबारी तक सीमित नहीं रहेगा। साइबर अटैक और मनोवैज्ञानिक युद्ध ईरान की शासन व्यवस्था को भीतर से हिलाने की कोशिश कर सकते हैं।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें व्हाइट हाउस की उस बैठक पर टिकी हैं, जहां तय होगा कि ट्रंप प्रशासन ईरान को लेकर चेतावनियों से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाता है या नहीं।
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