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अमेरिका दे सकता है भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की इजाजत! रिलायंस भी लाइन में, ट्रम्प बोले– ‘हम छीनी गई चीज वापस ले रहे हैं’
10 जन, 2026 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
अमेरिका दे सकता है भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की इजाजत! रिलायंस भी लाइन में, ट्रम्प बोले– ‘हम छीनी गई चीज वापस ले रहे हैं’

अमेरिका दे सकता है भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की इजाजत! रिलायंस भी लाइन में, ट्रम्प बोले– ‘हम छीनी गई चीज वापस ले रहे हैं’

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक चला, तो भारत की पेट्रोल-डीजल की कहानी फिर बदल सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प प्रशासन का एक सीनियर अधिकारी संकेत दे चुका है कि अमेरिका भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की इजाजत दे सकता है। मतलब ये कि सालों से बंद पड़ा वो व्यापार फिर से शुरू हो सकता है, हालांकि इस बार अमेरिका की सख्त निगरानी और शर्तों के साथ। यह खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार से लेकर भारत की बड़ी कंपनियों तक हलचल मच गई है। खास बात ये है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले ही अमेरिका से मंजूरी लेने की कोशिशों में जुट गई है।


क्यों अहम है वेनेजुएला का तेल भारत के लिए?

वेनेजुएला OPEC का सदस्य है और उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का भंडार है। इसके बावजूद वह वैश्विक सप्लाई में सिर्फ करीब 1% योगदान देता है, क्योंकि उस पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंध लगे हुए हैं। 2019 में अमेरिका ने वेनेजुएला पर सेकेंडरी सेंक्शंस लगाए थे। इसका मतलब ये हुआ कि जो भी देश या कंपनी वेनेजुएला से तेल खरीदेगी, उसे अमेरिकी बाजार और बैंकिंग सिस्टम से बाहर किया जा सकता है। इसी डर से भारत समेत कई देशों ने वहां से तेल खरीदना बंद कर दिया। तब भारत अपने कुल तेल आयात का लगभग 6% वेनेजुएला से लेता था। अगर अब फिर से इजाजत मिलती है, तो भारत के पास रूस, इराक और सऊदी अरब के अलावा एक और बड़ा विकल्प जुड़ जाएगा।


ट्रम्प का बड़ा दांव: 9 लाख करोड़ का निवेश और सस्ता ईंधन

शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में एक्सॉन मोबिल, कोनोकोफिलिप्स और शेवरॉन जैसी दिग्गज तेल कंपनियों के सीईओ से मुलाकात की। यहां उन्होंने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में करीब 9 लाख करोड़ रुपए के निवेश की बात कही। ट्रम्प ने कहा, “हम वही चीज वापस ले रहे हैं जो हमसे छीनी गई थी। अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करेंगी और उत्पादन को रिकॉर्ड स्तर तक ले जाएंगी। इससे अमेरिका में ऊर्जा की कीमतें और कम होंगी।” उन्होंने साफ कर दिया कि अमेरिका तय करेगा कि कौन-सी कंपनियां वेनेजुएला में जाएंगी और किसे निवेश की अनुमति मिलेगी।


रिलायंस क्यों बेचैन है?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वेनेजुएला से तेल खरीदने की मंजूरी के लिए अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट और ट्रेजरी डिपार्टमेंट से बातचीत शुरू कर दी है। असल में पश्चिमी देश भारत पर रूस से तेल आयात घटाने का दबाव बना रहे हैं। ऐसे में रिलायंस अपने लिए वैकल्पिक सप्लाई चेन तैयार करना चाहती है। रिलायंस के पास गुजरात में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स है, जिसकी क्षमता करीब 14 लाख बैरल प्रतिदिन है। 2025 के पहले चार महीनों में PDVSA ने रिलायंस को चार जहाजों से रोजाना करीब 63 हजार बैरल तेल भेजा था। लेकिन मार्च-अप्रैल 2025 में अमेरिका ने ज्यादातर लाइसेंस रद्द कर दिए और मई में आखिरी शिपमेंट भारत पहुंची। कंपनी ने साफ कहा है कि जैसे ही अमेरिकी नियमों के तहत गैर-अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला से तेल खरीदने की इजाजत मिलेगी, वह दोबारा खरीद शुरू कर सकती है।


3 से 5 करोड़ बैरल तेल अमेरिका को देगा वेनेजुएला

ट्रम्प ने हाल ही में दावा किया कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल “प्रतिबंधित तेल” सौंपेंगी। यह तेल बाजार भाव पर बेचा जाएगा और उससे मिलने वाली रकम ट्रम्प के नियंत्रण में रहेगी। 5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की मौजूदा कीमत करीब 25 हजार करोड़ रुपए आंकी जा रही है। ट्रम्प ने कहा कि इस पैसे का इस्तेमाल वेनेजुएला और अमेरिका दोनों के लोगों के हित में होगा। इसके लिए उन्होंने ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट को तुरंत योजना लागू करने के निर्देश भी दे दिए हैं।


भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है। 2023-24 में जब अमेरिका ने आंशिक राहत दी थी, तब भारत का वेनेजुएला से आयात 63 हजार से 1 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था। 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.41 अरब डॉलर तक चला गया, लेकिन मई 2025 की सख्ती के बाद 2026 की शुरुआत में यह घटकर सिर्फ 0.3% रह गया। अगर अमेरिका अब दोबारा हरी झंडी देता है, तो भारत को सस्ता और विविध स्रोतों से तेल मिलने का मौका मिलेगा। इसका सीधा फायदा देश की ऊर्जा सुरक्षा और आम जनता की जेब पर पड़ेगा।

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