
दुनिया के तमाम देशों में समय की गणना और कैलेंडर लगभग एक जैसे होते हैं, लेकिन अफ्रीका के सींग कहे जाने वाले देश इथियोपिया (Ethiopia) में आज भी दुनिया से करीब 7 से 8 साल पीछे का समय चलता है। यह कोई मजाक नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सच्चाई है, जो इस देश को बाकी दुनिया से अलग बनाती है।
इथियोपियाई कैलेंडर की खासियत क्या है?
इथियोपिया आज भी ‘इथियोपियाई कैलेंडर’ का पालन करता है, जिसे गी’इज़ कैलेंडर भी कहा जाता है। यह कैलेंडर ईसाई धर्म के प्राचीन अलेक्जेंड्रियन कैलेंडर पर आधारित है। इसमें एक साल में 12 महीने होते हैं और हर महीने में 30 दिन ही माने जाते हैं। इसके अलावा एक अतिरिक्त छोटा महीना भी होता है, जिसमें 5 या लीप ईयर में 6 दिन होते हैं।
वर्तमान में कितना साल चल रहा है?
जहां बाकी दुनिया 2025 में जी रही है, वहीं इथियोपिया में अभी 2017 चल रहा है। उनका नया साल भी ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुकाबले अलग समय पर आता है — हर साल 11 या 12 सितंबर को।
इतिहास में पीछे क्यों रह गया इथियोपिया?
इसके पीछे धार्मिक और ऐतिहासिक कारण हैं। इथियोपिया के चर्च रोमन चर्च के कैलेंडर सुधार को नहीं मानते। जब पोप ग्रेगोरी ने 16वीं शताब्दी में ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू कराया, तब इथियोपिया ने इसे अस्वीकार कर दिया और अपने पारंपरिक कैलेंडर को ही सही माना।
समय गिनने की पद्धति भी अनोखी
केवल साल ही नहीं, इथियोपिया में समय गिनने की पद्धति भी अलग है। यहाँ दिन की शुरुआत सूर्योदय से मानी जाती है। मतलब जब सूरज उगता है तो इथियोपियाई घड़ी में सुबह के 1 बजते हैं। इस कारण वहां के स्थानीय समय और इंटरनेशनल टाइम में अक्सर भ्रम की स्थिति बन जाती है।
पर्यटन के लिए भी खास
अपनी संस्कृति, प्राचीन परंपराओं और खास कैलेंडर की वजह से इथियोपिया पर्यटन के लिहाज से भी अनोखा अनुभव देता है। कई सैलानी सिर्फ इस अलग कैलेंडर और टाइम सिस्टम को देखने और समझने के लिए भी यहां आते हैं।
इथियोपिया दुनिया का इकलौता देश है जो अपने प्राचीन कैलेंडर को आज भी उतनी ही निष्ठा से मानता है। इस अनोखे कैलेंडर के कारण ही यह देश धरती पर एक ऐसा कोना है जहां कदम रखते ही आप इतिहास में 7 साल पीछे चले जाते हैं!
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