
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वांस और यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की के बीच व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हुई तीखी बहस ने दुनियाभर में हलचल मचा दी है। इस घटना ने यूक्रेन की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रूस के साथ उसके युद्ध के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
यूरोपीय नेताओं का यूक्रेन को समर्थन
➡️ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यूक्रेन को समर्थन जारी रखना बेहद जरूरी है।"
➡️ जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज़ ने भी समर्थन जताते हुए कहा, "यूक्रेन से ज्यादा शांति की जरूरत किसी को नहीं है। हम स्थायी समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं।"
➡️ कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने यूक्रेन के संघर्ष को लोकतंत्र और संप्रभुता की लड़ाई बताते हुए कहा, "हम यूक्रेन के साथ खड़े हैं और उसे न्यायपूर्ण शांति दिलाने के लिए हर संभव सहायता देंगे।"
➡️ हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान ने हालांकि ट्रंप का समर्थन किया और कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने बहादुरी से शांति का समर्थन किया, भले ही इसे पचाना कई लोगों के लिए मुश्किल था।"
दुनिया की मीडिया ने इस मुलाकात को कैसे देखा?
➡️ द गार्जियन ने इसे एक "दुनिया को चौंकाने वाला तमाशा" बताया और कहा कि यह बैठक "बिना किसी समझौते के समाप्त हुई, जिससे जेलेंस्की खाली हाथ लौटे।"
➡️ एसोसिएटेड प्रेस ने ट्रंप के रूस-यूक्रेन युद्ध में तुरंत संघर्षविराम की मांग पर ज़ोर दिया और बताया कि उन्होंने जेलेंस्की को आगाह किया कि अगर शांति वार्ता नहीं हुई तो अमेरिका का समर्थन कम हो सकता है।
➡️ पॉलिटिको ने बताया कि ट्रंप और उपराष्ट्रपति जे.डी. वांस ने जेलेंस्की को तीखी आलोचना का सामना कराया, जिससे बैठक अचानक खत्म हो गई और प्रस्तावित मिनरल्स डील पर भी हस्ताक्षर नहीं हो सके।
➡️ द सन ने जेलेंस्की को एक "वैश्विक नायक" बताया और लिखा, "जेलेंस्की ने अपने देश की बहादुरी से रक्षा की, लेकिन उन्हें ट्रंप और उनके उपराष्ट्रपति के अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ा। वे वाशिंगटन यह सोचकर पहुंचे थे कि वे यूक्रेन के लिए मदद सुरक्षित कर लेंगे, लेकिन उन्हें सिर्फ अपमान और निराशा मिली।"
➡️ डेली मिरर ने इस घटना को "जेलेंस्की के लिए घात लगाकर किया गया हमला" करार दिया और ट्रंप को "धमकाने वाला" बताया।
➡️ द इंडिपेंडेंट ने लिखा कि "उपराष्ट्रपति वांस ने पूरी तरह से प्रोपेगेंडा मोड में रहते हुए यह बैठक की।"
➡️ डेली टेलीग्राफ ने भी ट्रंप प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि व्हाइट हाउस का रवैया तथ्यात्मक, भू-राजनीतिक और नैतिक रूप से गलत था।
अब यूक्रेन और जेलेंस्की के लिए क्या?
एएफपी के अनुसार, ओवल ऑफिस में हुई यह गर्मागर्म बहस अप्रत्याशित नहीं थी। अंतरराष्ट्रीय संकट समूह (ICG) के वरिष्ठ सलाहकार ब्रायन फिनुकेन ने कहा, "यह बैठक तनावपूर्ण होने ही वाली थी, क्योंकि ट्रंप प्रशासन पहले से ही यूक्रेन को सैन्य मदद देने के खिलाफ रहा है।" यूक्रेनी राजनीतिक विश्लेषक वलोडिमिर फेसेनको ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का रवैया पहले से ही यूक्रेन के प्रति तनावपूर्ण था, और यह टकराव एक न एक दिन होना ही था। ICG के फिनुकेन का कहना है कि ट्रंप प्रशासन अब यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति रोकने पर विचार कर सकता है। ट्रंप के सत्ता में आने से पहले पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन के लिए अरबों डॉलर की सैन्य सहायता मंजूर की थी, लेकिन अब इस पर रोक लग सकती है। फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में जेलेंस्की ने स्वीकार किया कि अगर अमेरिका का समर्थन नहीं मिला तो यूक्रेन के लिए रूस को रोकना मुश्किल होगा।
क्या यूक्रेन को अमेरिका से अब भी मदद मिलेगी?
ट्रंप प्रशासन के मौजूदा संकेत यूक्रेन के लिए अच्छे नहीं हैं। अमेरिका की ओर से मिलने वाली सैन्य सहायता रुक सकती है, जिससे रूस के खिलाफ यूक्रेन की स्थिति कमजोर हो सकती है। हालांकि यूरोपीय देश पूरी तरह से यूक्रेन के समर्थन में खड़े हैं, लेकिन बिना अमेरिकी सहायता के जेलेंस्की के लिए यह लड़ाई और कठिन हो सकती है।
क्या अमेरिका-यूक्रेन संबंधों में बड़ा बदलाव आने वाला है?
ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से ही यह अंदेशा था कि उनका प्रशासन यूक्रेन पर दबाव बनाएगा। अगर यूक्रेन को मिलने वाली सैन्य सहायता रोकी जाती है, तो इसका सीधा फायदा रूस को मिलेगा। ट्रंप प्रशासन का झुकाव शांति वार्ता की ओर ज्यादा है, जबकि जेलेंस्की का मानना है कि यूक्रेन को अभी मजबूत समर्थन की जरूरत है।
व्हाइट हाउस में हुई ट्रंप, वांस और जेलेंस्की की तीखी बहस ने यह साफ कर दिया है कि यूक्रेन को अब अमेरिकी समर्थन के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी। यूरोप के बड़े देश अभी भी उसके साथ खड़े हैं, लेकिन अमेरिका के रुख में बदलाव आने से रूस-यूक्रेन युद्ध की दिशा भी बदल सकती है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यूक्रेन को सैन्य मदद मिलती है या नहीं, और क्या ट्रंप प्रशासन रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के लिए कोई बड़ा कदम उठाता है।
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