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TRF अब अमेरिका की आतंकी लिस्ट में! पहलगाम हमले के बाद बड़ी कार्रवाई, जयशंकर बोले- 'आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस'
18 जुल, 2025 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
TRF अब अमेरिका की आतंकी लिस्ट में! पहलगाम हमले के बाद बड़ी कार्रवाई, जयशंकर बोले- 'आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस'

TRF अब अमेरिका की आतंकी लिस्ट में! पहलगाम हमले के बाद बड़ी कार्रवाई, जयशंकर बोले- 'आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस'

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

वॉशिंगटन। अमेरिका ने आतंक के खिलाफ बड़ा फैसला लेते हुए पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन The Resistance Front (TRF) को विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (SDGT) की सूची में डाल दिया है। यह वही TRF है जिसने हाल ही में 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए घातक हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी।


अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार को बयान जारी करते हुए कहा, "TRF, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक मुखौटा संगठन है। यह भारत में नागरिकों पर हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है, जिनमें 2024 और 2025 के हमले शामिल हैं। 22 अप्रैल का हमला 2008 के मुंबई हमले के बाद सबसे बड़ा हमला था। यह कार्रवाई राष्ट्रपति ट्रम्प की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने पहलगाम हमले के लिए न्याय दिलाने की बात कही थी।"


TRF: हाइब्रिड आतंक का नया चेहरा

TRF एक ऐसा आतंकी संगठन है जो आम नागरिकों जैसे दिखने वाले युवाओं को आतंकी गतिविधियों में झोंक देता है। इन्हें 'हाइब्रिड आतंकवादी' कहा जाता है, जो सामान्य जीवन जीते हुए आतंकी साजिशों को अंजाम देते हैं। TRF मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय है और कई आतंकी घटनाओं की जिम्मेदारी ले चुका है।

भारत सरकार ने भी 5 जनवरी, 2023 को TRF को आतंकवादी संगठन घोषित किया था।


भारत ने की सराहना, जयशंकर ने कहा- 'जीरो टॉलरेंस'

TRF पर अमेरिका की इस बड़ी कार्रवाई पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, "भारत-अमेरिका के आतंकवाद विरोधी सहयोग की यह मजबूत पुष्टि है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो को धन्यवाद कि उन्होंने TRF को FTO और SDGT घोषित किया। आतंकवाद के लिए हमारी नीति बिल्कुल स्पष्ट है — जीरो टॉलरेंस!"


ट्रम्प प्रशासन दिखा रहा सख्ती

रिपब्लिकन प्रशासन के इस फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिका का यह कदम पाकिस्तान की दोहरी नीति पर भी एक कड़ा संदेश है।

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