
वॉशिंगटन में अमेरिका और इजरायल की हाई-लेवल मुलाकात ने दुनिया की नजरें अपनी तरफ खींच लीं। करीब तीन घंटे तक चली बंद कमरे की चर्चा के बाद भी कोई बड़ा ऐलान सामने नहीं आया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया के जरिए बताया कि बातचीत सकारात्मक रही, लेकिन अभी किसी ठोस नतीजे तक पहुंचना बाकी है। ईरान और गाजा को लेकर बने हालात ने इस बैठक को और ज्यादा अहम बना दिया है।
क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप?
बैठक के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी देते हुए कहा कि समझौता होना उनकी पहली प्राथमिकता है, लेकिन अगर बात नहीं बनती तो आगे की रणनीति बाद में तय की जाएगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान के साथ बातचीत जारी रखी जाएगी ताकि संभावित समझौते की गुंजाइश देखी जा सके। ट्रंप ने पिछली सैन्य कार्रवाई का जिक्र करते हुए चेतावनी भी दी। उनका कहना था कि पहले जब ईरान ने समझौते से इनकार किया था, तब अमेरिका ने ‘मिडनाइट हैमर’ नाम से कार्रवाई की थी, जिसका असर ईरान के लिए अच्छा नहीं रहा था।
गाजा युद्ध और मिडिल ईस्ट की स्थिति पर चर्चा
बैठक में गाजा में जारी संघर्ष और पूरे मध्य पूर्व के हालात पर भी विस्तार से बातचीत हुई। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि क्षेत्र के देश इस बार ज्यादा जिम्मेदारी दिखाएंगे और हालात को स्थिर बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका क्षेत्र में दूसरी एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भेजने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है, जो आने वाले दिनों में बड़ा कदम माना जा सकता है।
इजरायल का बयान: सुरक्षा मुद्दों पर जोर
मुलाकात के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने बयान जारी कर बताया कि नेतन्याहू ने चर्चा के दौरान इजरायल की सुरक्षा जरूरतों को प्रमुखता से रखा। दोनों नेताओं के बीच ईरान, गाजा और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनाए रखने की बात कही गई। हालांकि बयान में किसी अंतिम फैसले या नई नीति का जिक्र नहीं किया गया।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक भविष्य की रणनीति तय करने की दिशा में एक शुरुआती कदम है। ईरान के साथ बातचीत जारी रहने और मिडिल ईस्ट में सैन्य गतिविधियों पर संभावित फैसले आने वाले समय में वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

