
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अलास्का में हुई 2 घंटे 45 मिनट लंबी मुलाकात ने दुनियाभर का ध्यान खींचा। बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, लेकिन ट्रंप ने भारत का नाम लेकर बड़ा बयान दिया।
भारत पर लगाया दबाव
ट्रंप ने अमेरिकी न्यूज चैनल से कहा, "जब हमने भारत से कहा कि आप रूस से तेल खरीद रहे हैं और हम इस पर टैरिफ लगाएंगे, तो भारत को रूसी तेल से हाथ धोना पड़ा। इससे रूस ने एक बड़ा ग्राहक खो दिया और पुतिन बातचीत की मेज पर आने के लिए तैयार हुए।"
उन्होंने चेतावनी दी कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर नए टैरिफ का मुद्दा “दो या तीन हफ्ते में फिर से विचार” किया जाएगा।
भारत का पलटवार
भारत ने ट्रंप के दावे को सिरे से नकार दिया। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष ए.एस. साहनी ने कहा कि “रूस से तेल आयात पर कोई रोक नहीं है, आर्थिक आधार पर खरीद जारी रहेगी।” विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी टैरिफ को अनुचित बताया।
टैरिफ का खतरा बरकरार
भारत पर रूस से तेल खरीदने पर 25% टैरिफ 27 अगस्त से लागू होना है। हालांकि, ट्रंप-पुतिन मुलाकात के बाद माना जा रहा है कि इस फैसले को आगे बढ़ाया जा सकता है।
मॉस्को में अगली बैठक?
पुतिन ने अगली रूस-अमेरिका बैठक मॉस्को में करने का प्रस्ताव दिया। ट्रंप ने कहा कि यह कदम विवादास्पद हो सकता है, लेकिन उन्होंने इसे नकारा भी नहीं।
ट्रंप ने दोहराया कि “अगर मैं 2022 में राष्ट्रपति होता तो यूक्रेन युद्ध नहीं होता।”
अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका सचमुच भारत पर 25% टैरिफ लगाएगा या फिर पुतिन से बातचीत के बाद इसमें ढील मिलेगी।
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