
नीदरलैंड्स। मध्य पूर्व में 12 दिन तक चली खतरनाक जंग के बाद सीजफायर की घोषणा कर दुनिया का ध्यान खींचने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर सुर्खियों में हैं। बुधवार को नीदरलैंड्स में NATO समिट के दौरान ट्रम्प ने ईरान की तारीफ करते हुए कहा, “ईरान ने जंग में बहादुरी दिखाई। वे ऑयल का कारोबार करते हैं और मैं चाहूं तो इसे रोक सकता हूं, लेकिन मैं ऐसा नहीं करना चाहता।” इसके साथ ही उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार मुकदमे को राजनीतिक साजिश बताते हुए इसे खत्म करने की मांग भी कर दी।
ईरान को उबरने के लिए ऑयल बेचने दीजिए : ट्रम्प
ट्रम्प ने कहा कि युद्ध के बाद ईरान को आर्थिक रूप से संभलने की जरूरत है और इसके लिए तेल का निर्यात जरूरी है। “अगर चीन, ईरान से ऑयल खरीदना चाहता है तो हमें कोई दिक्कत नहीं है। मैं चाहता हूं कि चीन अमेरिका से भी तेल खरीदे।” उन्होंने साफ किया कि अगले हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की योजना है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि वॉशिंगटन अब मध्य-पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में ठोस पहल कर रहा है।
"ये राहत नहीं है", व्हाइट हाउस का स्पष्टीकरण
ट्रम्प के बयान के तुरंत बाद व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सफाई देते हुए कहा कि “यह ईरान पर लगे प्रतिबंधों में कोई औपचारिक राहत नहीं है। अमेरिका की नीति में बदलाव नहीं हुआ है।” हालांकि ट्रम्प के बयान से संकेत मिला है कि अमेरिका अब व्यवहारिक कूटनीति के रास्ते पर आगे बढ़ सकता है।
नेतन्याहू पर मुकदमे को बताया ‘राजनीतिक साजिश’
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मुकदमे को लेकर ट्रम्प ने तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा, “इजराइल अपने प्रधानमंत्री के खिलाफ बेतुका मुकदमा चला रहा है। नेतन्याहू जैसा मजबूत नेता ही देश को मुश्किल समय से निकाल सकता है।” उन्होंने कहा, “नेतन्याहू का मुकदमा तुरंत रद्द किया जाना चाहिए या फिर उन्हें माफी दी जानी चाहिए। वह एक महान नायक हैं, जिन्होंने देश के लिए बहुत कुछ किया है।”
“अब अमेरिका नेतन्याहू को बचाने जा रहा है” – ट्रम्प का एलान
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “अमेरिका ने इजराइल को बचाया है और अब अमेरिका नेतन्याहू को बचाने जा रहा है। न्याय के नाम पर किया जा रहा मजाक अब और नहीं चल सकता।” उनकी यह टिप्पणी इजराइल की न्यायिक प्रक्रिया पर अप्रत्यक्ष दबाव मानी जा रही है, जो पहले ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा का विषय बन चुकी है।
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