
अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर दक्षिण एशिया चर्चा के केंद्र में आ गया है। वॉशिंगटन में आयोजित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को रोकने में उनकी कूटनीतिक चेतावनी निर्णायक साबित हुई।
ट्रम्प का दावा: टैरिफ और ट्रेड डील का दबाव
ट्रम्प ने अपने संबोधन में कहा कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण थे और हवाई संघर्ष तेज हो चुका था, तब उन्होंने दोनों देशों के नेताओं से सीधे बात की। उनके मुताबिक उन्होंने साफ संकेत दिया था कि अगर टकराव नहीं रुका तो व्यापारिक रिश्तों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें भारी टैरिफ लगाने का विकल्प भी शामिल था। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक नुकसान की आशंका सामने आते ही दोनों देश बातचीत के लिए तैयार हुए। ट्रम्प ने दावा किया कि उस दौर में कई महंगे लड़ाकू विमान भी गिराए गए थे, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये विमान किस देश के थे।
शहबाज शरीफ की तारीफ और वायरल वीडियो
कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी भी चर्चा में रही। ट्रम्प ने मंच से कहा कि शरीफ ने उनके चीफ ऑफ स्टाफ के सामने उन्हें दक्षिण एशिया में शांति स्थापित करने वाला नेता बताया। इस दौरान दोनों नेताओं की बातचीत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया, जिसमें शरीफ ट्रम्प की भूमिका की सराहना करते नजर आए।
पहलगाम हमला और उसके बाद का सैन्य तनाव
क्या हुआ था पहलगाम में?
पिछले साल अप्रैल में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 भारतीय पर्यटकों की मौत के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई की थी। मई की शुरुआत में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकियों के ठिकानों पर लक्षित ऑपरेशन किए, जिनमें बहावलपुर और मुरीदके जैसे इलाके शामिल बताए गए।
जवाब में पाकिस्तान की कोशिश
इसके बाद पाकिस्तान ने भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाने की कोशिश की। रिपोर्ट्स के मुताबिक ड्रोन हमलों में विदेशी तकनीक का इस्तेमाल हुआ, लेकिन भारतीय वायुसेना और एयर डिफेंस सिस्टम ने उन्हें रोक दिया। सीमा पर तोपखाने और रॉकेट लॉन्चरों के जरिए भी जवाबी कार्रवाई हुई, जिससे तनाव और बढ़ गया था।
चीन दौरे की घोषणा और शी जिनपिंग पर टिप्पणी
अपने भाषण में ट्रम्प ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपने रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि वे अप्रैल में चीन जाने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने पिछले दौरे की यादें साझा करते हुए चीनी सैन्य परेड को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी भी की।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ क्या है और क्यों चर्चा में?
ट्रम्प ने जिस मंच से यह बयान दिया, वह उनका प्रस्तावित वैश्विक मंच ‘बोर्ड ऑफ पीस’ है। यह पहल शुरुआत में गाजा संघर्ष को शांत करने के उद्देश्य से सामने आई थी, लेकिन अब इसे दुनिया के अन्य विवादों को सुलझाने के लिए भी इस्तेमाल करने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि करीब 60 देशों को इसमें शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया है। मसौदा चार्टर के मुताबिक, लंबे समय तक सदस्य बने रहने के लिए भारी आर्थिक योगदान की शर्त रखी गई है। फिलहाल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अन्य स्थायी सदस्य देशों ने इस पहल पर खुलकर समर्थन नहीं दिया है। कुछ देशों को आशंका है कि इससे वैश्विक कूटनीति में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका कमजोर पड़ सकती है, हालांकि ट्रम्प ने कहा कि यह मंच UN के सहयोग से ही काम करेगा।
ट्रम्प के ताजा बयान ने भारत-पाक संबंधों और वैश्विक कूटनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ वे खुद को शांति स्थापित करने वाला नेता बता रहे हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस दावे और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की भूमिका को लेकर सतर्क नजर आ रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह पहल वास्तव में किसी बड़े वैश्विक समाधान का रास्ता बन पाती है या सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहती है।
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