
वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका को इन दिनों भारत की कुछ नीतियों से काफी चिढ़ हो रही है। खासकर भारत द्वारा रूस से लगातार सस्ता कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिका नाखुश है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने खुद इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यह मामला भारत-अमेरिका के संबंधों में तनाव का कारण बनता जा रहा है।
भारत हमारा सहयोगी है, लेकिन हर बात पर सहमति नहीं हो सकती - रुबियो
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मीडिया से बातचीत में कहा, "भारत हमारा रणनीतिक सहयोगी है, लेकिन विदेश नीति में आप हर चीज पर एकमत नहीं हो सकते। भारत की ऊर्जा ज़रूरतें काफी अधिक हैं और वह अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सस्ता रूसी तेल खरीद रहा है।"
उन्होंने यह भी जोड़ा कि, “रूस प्रतिबंधों के कारण सस्ती दरों पर तेल बेच रहा है, जिससे उसे यूक्रेन युद्ध में आर्थिक मजबूती मिलती है। भारत की रूस से तेल खरीद इस मुद्दे को और संवेदनशील बना देती है।”
भारत क्यों खरीद रहा है रूस से तेल?
➡️ रूस से मिलने वाला तेल बेहद सस्ता है
➡️ भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग और आर्थिक जरूरतें
➡️ पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस अभी भी एक भरोसेमंद तेल आपूर्तिकर्ता
➡️ भारतीय कंपनियां कर रही हैं रूसी डिस्काउंट का फायदा
अमेरिका लगाएगा नया टैरिफ, लेकिन एक हफ्ते की मोहलत
1 अगस्त से अमेरिका भारत पर 25% टैरिफ लगाने वाला था, लेकिन इसे एक हफ्ते के लिए टाल दिया गया है।
➡️ टैरिफ का असर: भारतीय उत्पादों की अमेरिका में कीमतें बढ़ेंगी
➡️ अमेरिका का दावा: भारत दुनिया में सबसे ज्यादा टैरिफ लगाता है
ट्रंप का तीखा बयान
"भारत हमारा मित्र है, लेकिन वह दुनिया का सबसे बड़ा टैरिफ लगाने वाला देश है। इसी कारण से अमेरिकी सामान भारत में महंगे हो जाते हैं।" पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह बयान देकर फिर से व्यापार संतुलन को लेकर भारत पर निशाना साधा है।
क्या भारत पर बनेगा दबाव?
भारत फिलहाल रूस से तेल खरीद को लेकर अपनी नीति बदलने को तैयार नहीं दिख रहा है। लेकिन अमेरिका का दबाव, टैरिफ बढ़ोतरी और ट्रेड वार का खतरा इन सभी कारणों से आने वाले समय में भारत को कूटनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
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