
एक निजी चैनल से बातचीत में CBIC चेयरमैन संजय कुमार अग्रवाल ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा, “टैक्स कटौती का पूरा लाभ जनता तक पहुंचे, इसके लिए सरकार ने प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू किया है।” अब रेट घटने से पहले और बाद का पूरा डेटा इकट्ठा किया जाएगा, ताकि पता चले कि इंडस्ट्री सच में फायदा ग्राहकों को दे रही है या नहीं।
जीएसटी कलेक्शन में रिकॉर्ड ग्रोथ
अग्रवाल ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में जीएसटी कलेक्शन लगभग 22 लाख करोड़ रुपये रहा।
➡️ यह दर्शाता है कि टैक्स सिस्टम अब स्थिर हो चुका है।
➡️ सरकार का अगला कदम: GST को और आसान और पारदर्शी बनाना।
➡️ योजना: रेट्स को दो हिस्सों में बांटना—स्टैंडर्ड रेट और मेरिट रेट।
इंडस्ट्री ने किया वादा, सरकार को भरोसा
कई सेक्टर्स ने अखबारों में विज्ञापन देकर आश्वासन दिया है कि “रेट कटौती का फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा।”
सरकार को उम्मीद है कि:
➡️ इस बार शिकायतें कम होंगी।
➡️ घरेलू खपत बढ़ेगी।
➡️ राजस्व ग्रोथ और मजबूत होगी।
क्यों जरूरी है प्राइस मॉनिटरिंग
संजय कुमार अग्रवाल ने कहा, “टैक्स कटौती का फायदा अक्सर बीच में अटक जाता है और ग्राहक तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता। इसे रोकने के लिए फील्ड ऑफिसर्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे रेट कट से पहले और बाद का डेटा इकट्ठा करें।” इस डेटा एनालिसिस से साफ होगा कि कंपनियां सच में टैक्स कट का लाभ ग्राहकों को दे रही हैं या नहीं।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

