
भोपाल, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। उसने कहा कि हालांकि यह दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले ज्यादा रहेगी। वित्त मंत्रालय के मुताबिक दुनिया भर की एजेंसियों ने वैश्विक आर्थिक ग्रोथ के धीमे होने का अनुमान जताया है, जिसके साथ कमोडिटी की बढ़ती कीमतें सप्लाई चेन में रुकावटें और अनुमान से ज्यादा जल्दी मौद्रिक समर्थन को वापस लेने जैसी घटनाएं देखने को मिलेगी।
मई 2022 के लिए मंथली इकोनामी रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट को बढ़ाकर 4.9 फ़ीसदी करना और एक्साइज ड्यूटी में कटौती ट्रेडिंग पॉलिसी में बदलाव और सरकार के कैपेक्स को बढ़ाने के लिए कोशिशों से मांग पर नियंत्रण किए जाने की उम्मीद है। इससे मौजूदा वित्तीय वर्ष में आर्थिक ग्रोथ को भी मजबूती मिलेगी।
माइक्रो इकनोमिक स्थिरता को देनी होगी प्राथमिकता
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मध्य अवधि में प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव स्कीम के सफल लॉन्च, ऊर्जा के रिन्यूएबल स्रोतों के विकास के साथ कच्चे तेल के आयात को डायवर्सिफाई और फाइनैंशल सेक्टर को मजबूत बनाने से आर्थिक ग्रोथ में तेजी आने की उम्मीद है। इस वित्तीय वर्ष में ग्रोथ बरकरार रखने महंगाई को काबू करने के साथ राजकोषीय घाटे को बजट में रखना, एक्सचेंज रेट में धीरे-धीरे बदलाव लाना नीति बनाने वालों के लिए बड़ी चुनौती है। मंत्रालय ने आगे कहा कि इससे सफलतापूर्वक करने के लिए करीबी अवधि में ग्रोथ के ऊपर माइक्रो इकोनॉमिक स्थिरता को प्राथमिकता देनी होगी। ऐसे हो जाने पर भारत में निवेश की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त घरेलू और विदेशी कैपिटल मिलेगा। मंत्रालय के मुताबिक इसके साथ ऐसी आर्थिक ग्रोथ होगी जो भारत की नौकरियों और करोड़ों भारतीयों के जीवन की आकांक्षाओं को पूरा करेगी।
अर्थव्यवस्था को लगा झटका
पिछले महीने जारी आधिकारिक डेटा के मुताबिक अर्थव्यवस्था 31 मार्च को खत्म होने वाली तिमाही में 4.1 फ़ीसदी की दर से बढ़ी है, जो 1 साल में सबसे धीमी रफ्तार है। पूरे साल की बात करें तो अर्थव्यवस्था में 8.7 फ़ीसदी की दर से ग्रोथ हुई है, जो सरकार के आकलन 8.9 फ़ीसदी से कम है। महामारी से जुड़े प्रतिबंधों के हटने के बाद आर्थिक गतिविधियों में रिकवरी आने की उम्मीद थी।
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