
भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पर अब Apollo Tyres का लोगो नजर आएगा। कंपनी ने 2027 तक के लिए तीन साल का करार किया है, जिसकी कुल कीमत 579 करोड़ रुपये है। यह पिछले प्रायोजक Dream11 के 4 करोड़ रुपये प्रति मैच के कॉन्ट्रैक्ट से काफी बड़ा है। इस डील को पाने के लिए Apollo Tyres ने Caneva और JK Cements को पछाड़ा। अब हर मैच में टीम इंडिया की जर्सी पर Apollo का लोगो चमकेगा।
1 रुपये में बिकने वाली कंपनी से मल्टीनेशनल ब्रांड तक
आज Apollo Tyres देश की दूसरी सबसे बड़ी टायर कंपनी है, लेकिन कभी इसके संस्थापक इसे सिर्फ 1 रुपये में बेचने को मजबूर हो गए थे। दरअसल 1975 में देश में इमरजेंसी के दौरान बिजनेस पर संकट आया। हालात इतने खराब थे कि संस्थापक रौनक सिंह कंपनी बेचने का मन बना चुके थे। तभी उनके बेटे ओंकार सिंह कंवर ने जिम्मेदारी संभाली और कंपनी को डूबने से बचाया।
पाकिस्तान के सियालकोट से भारत तक का सफर
Apollo Tyres के चेयरमैन ओंकार सिंह कंवर का जन्म पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था। बंटवारे के दौरान परिवार सबकुछ छोड़कर भारत आया। शुरू में पाइप का बिजनेस किया, बाद में टायर निर्माण की शुरुआत हुई। अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी करने के बाद ओंकार 1964 में भारत लौटे और पारिवारिक कारोबार में जुट गए।
अरबों की संपत्ति के मालिक
ओंकार सिंह कंवर की अनुमानित नेट वर्थ 1.4 से 1.6 अरब डॉलर (करीब 11,600–13,300 करोड़ रुपये) है। उनके बेटे नीरज कंवर, जो कंपनी के वाइस चेयरमैन और एमडी हैं, के पास भी करोड़ों की हिस्सेदारी है। नीरज की सार्वजनिक रूप से घोषित संपत्ति लगभग 32 करोड़ रुपये बताई जाती है।
Apollo Tyres का अब तक का सफर
➡️ भारत में टायर उद्योग में दूसरे नंबर पर।
➡️ यूरोप, एशिया और अफ्रीका में मजबूत उपस्थिति।
➡️ क्रिकेट से जुड़कर अब ब्रांड को वैश्विक पहचान देने की तैयारी।
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