
रसोई गैस की महंगाई से जूझ रहे आम लोगों के लिए एक और बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार अब LPG सब्सिडी कैलकुलेट करने का तरीका बदलने की तैयारी में है। अंग्रेजी अखबार The Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार यह कदम तब उठा रही है जब सरकारी तेल कंपनियों ने अमेरिका के एक्सपोर्टर्स के साथ एक साल के लिए LPG सप्लाई का समझौता किया है।
इस बदलाव का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है – यानी आने वाले समय में सिलेंडर के दाम या सब्सिडी का गणित बदल सकता है।
अब तक कैसे तय होती थी LPG सब्सिडी?
अभी तक भारत में LPG सब्सिडी की गणना Saudi Contract Price (SCP) के आधार पर होती है। यह कीमत मिडिल ईस्ट, खासकर सऊदी अरब से आने वाली LPG के लिए एक बेंचमार्क मानी जाती है। सरल शब्दों में कहें तो सरकार यह देखती है कि सऊदी अरब से LPG कितने दाम में आ रही ह। उसी के आधार पर यह तय होता है कि तेल कंपनियों को कितनी भरपाई (सब्सिडी) दी जाए। ताकि घरेलू ग्राहकों को गैस बहुत महंगी न पड़े, लेकिन अब तेल कंपनियां कह रही हैं कि यह फॉर्मूला पुराने दौर का हो चुका है।
अमेरिका से आने वाली LPG ने बदल दी तस्वीर
तेल कंपनियों के अधिकारियों ने The Economic Times को बताया है कि अब अमेरिका से LPG का आयात लगातार बढ़ रहा है और वहां से आने वाली गैस की शिपिंग लागत सऊदी अरब से लगभग चार गुना ज्यादा है।
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका से LPG भारत के लिए तभी सस्ती साबित होती है जब वह भारी छूट पर मिले, सामान्य हालात में अमेरिका से LPG लाना सऊदी अरब की तुलना में कहीं ज्यादा महंगा पड़ता है। इसी वजह से कंपनियां चाहती हैं कि सब्सिडी तय करते समय अमेरिका से आने वाली LPG की कीमत और उसकी ऊंची शिपिंग लागत को भी फॉर्मूले में शामिल किया जाए।
क्या अब सिलेंडर और महंगा होगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है – क्या इससे घरेलू LPG सिलेंडर महंगा हो जाएगा? इसका जवाब अभी साफ नहीं है, लेकिन पूरी कहानी समझिए। पिछले महीने इंडियन ऑयल, BPCL और HPCL ने अमेरिका से 22 लाख टन LPG आयात करने का एक साल का करार किया है, जो भारत के कुल LPG इंपोर्ट का करीब 10% है। पहले अमेरिका से LPG सिर्फ तभी खरीदी जाती थी, जब स्पॉट मार्केट में दाम बेहद सस्ते होते थे। यह पहली बार है जब अमेरिका के साथ लंबी अवधि का समझौता हुआ है।
अब जिस कीमत पर तेल कंपनियां LPG खरीदेंगी, उसी का असर घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत पर पड़ेगा। हालांकि सरकार कीमतों पर एक सीमा (कैप) लगाकर रखती है, ताकि जनता पर अचानक बोझ न पड़े। अगर कंपनियों को नुकसान होता है तो सरकार सब्सिडी देकर उसकी भरपाई करती है।
ऐसे में अगर सब्सिडी का फॉर्मूला बदला गया, तो यह तय करेगा कि सरकार को गैस पर कितना खर्च करना पड़ेगा – और भविष्य में सिलेंडर के दाम कैसे रहेंगे।
अमेरिका से बढ़ता तेल और गैस इंपोर्ट, रूस पर घटती निर्भरता
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिका लगातार भारत पर दबाव बना रहा है कि वह रूस से तेल खरीद कम करे। ट्रंप सरकार भारत पर 50% टैरिफ लगा चुकी है, जिसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने पर 25% का अतिरिक्त जुर्माना भी शामिल है।
हालांकि भारत ने साफ कहा है कि वह अपने फैसले राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही करेगा, लेकिन इसके बावजूद रूस से इंपोर्ट कुछ हद तक घटा है और अमेरिका से तेल खरीद बढ़ी है।
Kpler के आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर में भारत ने अमेरिका से करीब 5.40 लाख बैरल प्रति दिन कच्चा तेल आयात किया। यह 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। यानी अमेरिका अब भारत के लिए सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि LPG सप्लाई में भी बड़ी भूमिका निभाने वाला है।
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