
नई दिल्ली। भारत-चीन रिश्तों पर पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन का बड़ा धमाका! उन्होंने साफ कह दिया कि दोनों देशों के बीच “जल्दी दोस्ती” का ख्वाब देखना बेकार है। राजन के मुताबिक, सदियों से चले आ रहे ऐतिहासिक मतभेद और अविश्वास इस रिश्ते को आसान नहीं बनने देंगे। एक पॉडकास्ट में स्पारएक्स के मुकेश बंसल से खुलकर बातचीत में राजन ने कहा— “दोस्ती के लिए सालों तक विश्वास बनाना पड़ेगा। भारत के गहरे रिश्ते कहीं और हैं।”
अमेरिका-भारत रिश्तों पर बड़ा बयान
रघुराम राजन ने याद दिलाया कि भारत और अमेरिका दोनों मजबूत लोकतंत्र हैं और लंबे समय से सहयोगी रहे हैं। उन्होंने कहा, “1960 के दशक में अमेरिका से अनाज आया था, जिससे हमारे लोगों को भोजन मिला। आज कई भारतीय अमेरिका में सरकार और निजी क्षेत्र में ऊंचे पदों पर हैं।”
“चीन से दोस्ती का शॉर्टकट नहीं”
राजन ने साफ किया कि भारत चीन के साथ व्यापारिक संबंधों का फायदा उठाकर अमेरिका के टैरिफ को कम नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, “व्यापारिक रिश्ते समय लेते हैं। भारत और चीन दोनों ही ऐसे सामान बेचना चाहते हैं, जो अमेरिका नहीं खरीदना चाहता।”
उन्होंने उदाहरण दिया कि भारत को छोटे अवसर जरूर मिल सकते हैं—“जैसे चीन को झींगा बेचना”—लेकिन असली हल अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद सुलझाने में है।
निवेश और मैन्युफैक्चरिंग पर राजन की राय
भारत को चीनी निवेश का स्वागत करने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा, “भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है और चीन दूसरी है, जो जल्द ही पहली भी बन सकता है। भारत चीनी निवेश का स्वागत कर सकता है, इससे मैन्युफैक्चरिंग में सीखने का मौका मिलेगा, लेकिन यह दोतरफा रास्ता होना चाहिए।”
“भारत सबका टारगेट, ताकत पहचानो”
रघुराम राजन ने भारत की ताकत पर जोर देते हुए कहा, “भारत की अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन डॉलर की है। वह भू-रणनीतिक खेल में ऐसा पुरस्कार है जिसे हर कोई अपनी तरफ रखना चाहेगा। भारत को रणनीतिक रूप से खेलना चाहिए। हमारा घरेलू बाजार इतना बड़ा है कि कमजोर मांग वाले देश इस पर नजर रख रहे हैं। भारत इसका इस्तेमाल एक हथियार की तरह कर सकता है।”
जापान से सीखने की सलाह
राजन ने सफल साझेदारियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को जापान के साथ अपने अनुभव से सीखना चाहिए। “जापानी निवेश भारत में आता है, हमारे श्रमिकों को प्रशिक्षित करता है और जापानी-भारतीय फर्में बनाता है। मारुति सुजुकी इसका एक उदाहरण है। भारत को इस तरह के और अधिक संयुक्त उद्यमों का लक्ष्य रखना चाहिए।”
रघुराम राजन का साफ संदेश है—भारत को अपनी ताकत पहचानकर रणनीतिक फैसले लेने होंगे। चीन से दोस्ती में जल्दबाज़ी नहीं, बल्कि समझदारी की ज़रूरत है, और अमेरिका के साथ मजबूत साझेदारी बनाए रखना ही भारत के लिए असली गेम चेंजर होगा।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

